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कांटों पर चल राह बनाई है शशांक कुमार ने

नजरें मंजिल पर, पैर जमीं पे और आसमान छूता हौसला। झारखंड के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार खूंटी के शशांक कुमार से आप जब मिलेंगे, तो उसके व्यक्तित्व का खाका कुछ यूं ही उभरकर सामने आएगा।

शहर में बेहतर शिक्षा का अभाव, पिता की लंबी बीमारी और परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद शशांक ने हार नहीं मानी। उसकी मंजिल है आईआईटी और उसके सपनों को साकार करने में सहभागी बना है-हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप। शशांक को अब ब्रिलियंट ट्यूटोरियल्स से मुफ्त इंजीनियरिंग की कोचिंग मिलेगी। जाहिर है, उसके चयन से उसके अधिवक्ता पिता विनोद कुमार ठाकुर और माता कुसुम देवी दोनों काफी खुश हैं। कुसुम देवी एक स्थानीय प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। पिता की लंबी बीमारी ने परिवार को आर्थिक दृष्टि से पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने प्रतिभा-कौशल और मेहनत से शशांक ने न सिर्फ राह बनाई है बल्कि कइयों को राह दिखाई भी है। स्थानीय डीएवी स्कूल का वह छात्र है और उसके चयन से उसके सहपाठी और मित्र भी फूले नहीं समां रहे। इससे पूर्व शशांक ने स्थानीय आइडियल नेशनल एकेडमी से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। फिर दसवीं की परीक्षा में 94.6 प्रतिशत अंक लाकर उसने खूंटी में परचम लहरा दिया। अपने स्कूल का वह सेकेंड टॉपर था।

‘हिन्दुस्तान’ प्रायोजित कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए चयनित शशांक कुमार ने अपनी सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसका श्रेय माता-पिता, दादा-दादी और अपने चाचा को देता है। शिक्षकों का मार्गदर्शन भी उसके काम आया। अपनी भावी योजना के बारे में शशांक कुमार ने बताया कि वह आईआईटी-जेइइ के साथ ही एआईईईई की तैयारी की इच्छा भी रखता है। बकौल शशांक जीवन की तमाम सफलताएं एकनिष्ठ लगन, कड़ी मेहनत तथा बड़ों के आशीष और सहयोग पर आधारित होती हैं। इस सच्चाई को कभी नहीं भूलना चाहिए।

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