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जज्बे से हासिल हुई रविप्रकाश की मंजिल

रविप्रकाश ने साबित कर दिया है कि बुलंद हौसले के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। जरूरत बस ईमानदारी से प्रयास करने की है। बचपन से पढ़ने में अव्वल रविप्रकाश ने इंजीनियर बनने का सपना देखा है। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप ने बेहतर कॅरियर बनाने में जो मदद की है, उसे वह भूल नहीं सकता है। रविप्रकाश अपने बारे में बताता है : मेरी प्राथमिक शिक्षा औरंगाबाद जिले के रफीगंज में हुई। पापा अनिल शर्मा ज्वेलरी हॉकर हैं। पढ़ाई में अव्वल रहने के कारण वारूण के नवोदय विद्यालय में मैंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की। बड़े पापा अजित शर्मा चाहते थे कि रवि इंजीनियर बने। इसलिए वह आगे पढ़ने के लिए बोकारो आ गया और अयप्पा स्कूल में नामांकन कराया। रवि की मम्मी पुष्पा शर्मा गृहिणी हैं, लेकिन पढ़ाई के प्रति उन्होंने हमेशा उसका हौसला बढ़ाया है। रवि को सेल्फ स्टडी पर पूरा भरोसा है। घर के सभी लोगों का प्रोत्साहन हमेशा मिलता रहा है। जब हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए फॉर्म निकला, तो पापा-मम्मी ने कहा कि भर कर देखे। उसने फॉर्म भर दिया और फिर इसमें सफल भी रहा। वह कहता है : हिन्दुस्तान ने हमें नई राह दिखाई है। रविप्रकाश गर्व के साथ कहता है कि मन में इच्छा शक्ति और कुछ करने का जज्बा हो, तो इंसान के लिए हर मुश्किल आसान लगती है।

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