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मां-बाप के सपनों को पूरा करना है आयुष को

आयुष को अपने मां-बाप के सपनों को पूरा करना है। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहा है। उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि उसे हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए चुना गया है। डीपीएस, बोकारो के छात्र आयुष मिश्र का कहना है कि आर्थिक संकट से परेशान उसके माता-पिता का उसे इंजीनियर बनाने का सपना अब पूरा हो जायेगा। आयुष के पिता सहरसा में कांस्टेबल हैं, जबकि मां आशा देवी गृहिणी हैं। आयुष का कहना है कि बचपन से ही उसके माता-पिता का सपना उसे इंजीनियर बनाने का था। होश संभालते ही वह इसे पूरा करने में जुट गया। कड़ी मेहतन की, लेकिन आर्थिक संकट के कारण जो संसाधन उसे मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाया। बचपन से लेकर आज तक उसने ट्यूशन नहीं की। अब हिन्दुस्तान न केवल उसका सहारा बना है, बल्कि कोचिंग की व्यवस्था भी हो गई। आयुष की प्रारंभिक पढ़ाई सहरसा के सरकारी स्कूल में हुई। आठवीं में उसका चयन नवोदय विद्यालय में हो गया। आर्थिक कठिनाई के कारण एक बार उसे लगा कि उसका नामांकन वहां नहीं हो सकेगा, लेकिन उसके पिता ने उसकी इच्छा को बरकरार रखा। 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद बोकारो के डीपीएस में उसका नामांकन हुआ तथा सेल्फ स्टडी की बदौलत उसने हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की तैयारी की और इसमें सफल हुआ। आयुष का कहना है कि अगर हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप नहीं मिलता, तो उसका सपना अधूरा रह जाता। आयुष ने सफलता के लिए सेल्फ स्टडी को जरूरी बताया।

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