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हौसले को पंख देने की कोशिश में जुटा है आलोक

अपने हौसले को पंख देने की कोशिश में जुटा है आलोक कुमार। वह आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहता है। सहरसा निवासी इस किशोर की इच्छा उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश सेवा की है। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आए आलोक कड़ी मेहनत और लगन के बल पर अपने सपने पूरे करना चाहता है। उसने बताया कि हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप उसकी इस राह में उसका हमसफर है। यदि यह नहीं मिलता, तो इंजीनियर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होता। आलोक के पिता संजय कुमार सिंह गुजरात में ऑक्सजीन प्लांट में ऑपरेटर हैं। आलोक ने प्राइमरी शिक्षा बुद्ध पब्लिक स्कूल सहरसा से तथा दसवीं की परीक्षा स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निग पटना से पास की। दसवीं में उसे कुल 90.8 प्रतिशत अंक मिले। कम अंक रहने के कारण तथा आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उसने 11वीं में नामांकन अयप्पा स्कूल बोकारो में कराया है। 10वीं की परीक्षा में कम अंक आने के कारण वह काफी निराश हो गया था, पर कड़ी मेहनत की बदौलत हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप पाने में वह सफल रहा। आलोक कहता है : आगे भी लगन-परिश्रम की सहायता से अपने प्रदर्शन को सुधारने पर विशेष ध्यान दूंगा। एक समय तो ऐसा लगा कि आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकूंगा, पर हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप ने पुन: उम्मीद जगाई है। अब आगे का सपना भी अवश्य पूरा हो पाएगा। उसे पता है कि प्रदर्शन को सुधारने की जरूरत है। साथ ही 12वीं की परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने की भी चुनौती है।

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