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लक्ष्य पाने को हर त्याग किया अमित ने

अमित कुमार अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह सचेत है। वह जानता है कि उसे कहां जाना है। इसलिए वह किसी भी त्याग के लिए तैयार है। उसका हौसला बुलंद है। वह कहता है : हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप से मेरा आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। बचपन से लेकर आज तक इसी आत्मविश्वास के सहारे सफल होनेवाले अमित कुमार आईआईटी से इंजीनियर बनने के बाद सक्रिय राजनीति के क्षेत्र में प्रवेश करने का सपना देख रहा है। अमित का कहना है कि पढ़ाई के क्षेत्र में बोकारो हमेशा अव्वल रहा है। उसके माता-पिता गांव में रहते है। गांव में ढंग का स्कूल नहीं है। इसलिए पढ़ने के लिए बचपन से ही वह बोकारो में रहता है। अमित के पापा प्रमोद सिंह पिछले दो साल से बिहार में शिक्षा मित्र हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अमित बचपन से बोकारो में अपने नाना एनके यादव के यहां रह कर पढ़ाई करता है। अभी वह बीआईएसएस 2सी स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र है। अमित का कहना है कि उसकी हर जरूरत नाना ही पूरी करते हैं। मौसी सविता हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित करती हैं। उसे सेल्फ स्टडी पर पूरा भरोसा है। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए चयनित होने पर अमित का आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। उसने अपनी सफलता का श्रेय नाना-नानी को दिया। वह कहता है : किसी भी विद्यार्थी की सफलता के पीछे उसके शिक्षकों का मार्गदर्शन और पढ़ाई के प्रति उसका आत्मविश्वास ही काम आता है।

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