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कांटों को फूल बना डाला नदीम के हौसलों ने

धनबाद पाथरडीह के ईदगाह मुहल्ला की तंग गलियों से हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप हासिल करना किसी रोमांच से कम नहीं है। यह यात्रा अभी रुकी नहीं है। यह आइआइटी में सफलता के बाद भी जारी रहेगी। यह कहना है मो. नदीम शफी का। उसकी सफलता किसी भी गरीब व मेधावी छात्र के लिए प्रेरणास्रोत है। नदीम का सपना आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रिसर्च करने का है। वह बताता है : मुहल्ले की तंग गलियों में बेहतर पढ़ाई का माहौल नहीं था। किसी तरह पांचवीं तक की पढ़ाई बुनियादी स्कूल पाथरडीह से की। नदीम शुरू से ही मेधावी छात्र रहा। पिता मो. शफी ने वर्ष 04 में नेतरहाट आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए नदीम का फॉर्म भराया। जब परीक्षा में सफल हुआ, तो नदीम की खुशी का ठिकाना नहीं था। और जब हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप के लिए उसका चयन हुआ, तो नदीम की खुशी दोगुनी हो गई। नदीम कहता है : इस सफलता ने मेरा सपना पूरा करने का रास्ता खोज दिया। मामूली तनख्वाह पानेवाले पिता मो. शफी की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है कि वह अपने पुत्र को आईआईटी से इंजीनियर बनाने का खर्च वहन कर सकें। नेतरहाट आवासीय विद्यालय (रांची) में नदीम लगातार टॉप 10 में रहा। मैट्रिक में झारखंड में 95 प्रतिशत (465 अंक) प्राप्त कर वह पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर था। आश्रम अध्यक्ष विद्या चरण पांडेय और विद्यालय के प्राचार्य बिनोद कुमार कर्ण आदि शिक्षकों का भरपूर सहयोग नदीम को मिला। नदीम ने भी अपने शिक्षक के विश्वास को टूटने नहीं दिया। नदीम का कहना है कि आईआईटी पूरा कर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च करने की उसकी तमन्ना है। पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उसने कहा : हिन्दुस्तान ने एक गरीब लड़के का सपना पूरा कर दिया है।

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