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मुश्किलों ने हौसला नहीं तोड़ा है रागिनी का

गिरिडीह की रागिनी रूपम हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की परीक्षा में पास क्या हुई, खुशी से उछल गई। ऐसा लगा, जैसे उसके सपनों को पंख मिल गया हो और उसे अब मंजिल प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता है।
रागिनी रूपम गिरिडीह के शास्त्रीनगर में रहती है। उसकी इच्छा इंजीनियर बनने की है। आइआइटी करना उसका मकसद है। इसकी तैयारी में वह जुटी हुई है। उसके पिता राजकिशोर राय की सितम्बर 2007 में एक दुर्घटना में हुई मौत के बाद से उसके घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से गड़बड़ा गई। अपनी बहन और भाई के साथ बीएनएस डीएवी में वह पढ़ रही थी। लगा कि अब उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाएगी, पर भला हो डीएवी प्रबंधन का, जिसने इन तीनों की फीस माफ कर दी।

रागिनी की मां उषा राय कहती हैं कि इसके लिए पूरा परिवार डीएवी के प्राचार्य का शुक्रगुजार है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही रागिनी रूपम पढ़ने में तेज रही है। बोर्ड परीक्षा 89 प्रतिशत अंक लाकर उसने पास की थी। उन्होंने कहा कि गांव में कुछ खेती-बाड़ी है, उससे अनाज मिल जाता है। पुश्तैनी घर के एक हिस्से को किराए पर उठा रखा है। बच्चों की ट्यूशन वगैरह छूट गई है। दो-दो बजे रात तक जग कर बच्चों पढ़ाई कर रहे हैं। हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की परीक्षा में पास होने से उन्हें खुशी तो है, लेकिन इस बात से वह अब भी आशंकित हैं कि हॉस्टल और वहां के स्कूल में पढ़ने का खर्च वह कैसे उठाएंगी। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान की ओर से अगर यह खर्च भी उठा लिया जाता, तो वह धन्य हो जाती।

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