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हौसले को जिंदा रख मंजिल पाई दयानंद ने

फलक को जिद है यहीं बिजलियां गिराने की, तो हमें भी जिद है यहीं आशियां बनाने की। बाघमारा क्षेत्र का दयानंद कुमार यही जज्बा रखता है। उसने सपना देखा, अपने हौसले को जिंदा रखा और फिर मंजिल की ओर बढ़ चला है। बाघमारा की माटीगढ़ा हटमेंट कॉलोनी निवासी राजकुमार यादव का मंझला पुत्र दयानंद कुमार अपनी मंजिल की राह में आई तमाम अभावों और दुश्वारियों को परास्त करता रहा। आर्थिक तंगी के बावजूद उसकी निगाहें सिर्फ और सिर्फ अपनी मंजिल पर हैं। डीएवी दुग्धा से 84 प्रतिशत अंक लाकर 10वीं की परीक्षा पास करनेवाले दयानंद कुमार का संकल्प आईटी इंजीनियर बन देश की सेवा करने का है। बाधाओं से रोज दो-दो हाथ करनेवाले दयानंद और उसके परिजन सहयोग के लिए बढ़े दैनिक हिन्दुस्तान के हाथ को बड़ा सौगात मानते हैं। दयानंद का हौसला हिन्दुस्तान ने बढ़ा दिया है, यह उसकी मां सूमो देवी कह रही हैं। उन्होंने कहा : अब मेरा बेटा पीछे मुड़ कर नहीं देखने वाला है। दयानंद को लेकर उसकी मां की आंखों में हजारों सपने हैं। पिता के पास कोई स्थायी रोजगार नहीं। बावजूद इसके, दयानंद विचलित नहीं है। वह आशावान है। उसे भरोसा है कल पर। वह कहता है : आज हूं राई, पर्वत कल बनूंगा, आज हूं दीपक, दिवाकर कल बनूंगा।

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