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आटो चालक 12 को संसद का घेराव करेंगे

तिपहिया वाहनों की एक दिवसीय हड़ताल के कारण सूनी नजर आ रही दिल्ली के आटो चालकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो 12 अप्रैल को संसद का घेराव किया जाएगा।

दिल्ली आटो रिक्शा संघ के महामंत्री राजेंद्र सोनी ने गुरुवार को कहा कि हड़ताल एक दिन के लिए सांकेतिक तौर पर है और यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार के लिए बातचीत नहीं करती है तो संगठन 12 अप्रैल को संसद का घेराव करेगा।

 उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत के बराबर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन उसका कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए तैयार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें वार्ता के लिए बुलाने के वास्ते राजी ही नहीं है और वह आटो चालकों का गुस्सा भड़का रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी समय है और बात नहीं मानी गई तो 12 को संसद का घेराव करने के बाद आंदोलन करने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

 हाल ही में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली की आटो सेवा को बहुत खराब करार देते हुए कहा था कि दिल्ली सरकार लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकल्प पर विचार कर रही है।
 


 दिल्ली की सड़कों पर करीब 55000 आटो रिक्शा रोज दोड़ते हैं लेकिन आज आटो चालकों की हड़ताल के कारण दिल्ली की सडकें सूनी रहीं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में खाशी परेशानियों का सामना करना पडा। मैट्रों में अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ देखने को मिली। इसी तरह से आम तौर पर कम भरी रहने वाली डीटीसी की लाल रंग की वातानुकूलित बसें खचाखच भरी रहीं।

 बसुंधरा में रहने वाले रोहित कुमार ने कहा कि उनके पिता को लखनऊ जाना था लेकिन आटो की हडताल के कारण नई दिल्ली तक पहुंचने में दिक्कत की वजह से उन्हें अपनी यात्रा स्थगित करनी पडी। कुमार के दफ्तर में ही काम करने वाले राहुल का कहना है कि बाराखंभा रोड तक चार्टर्ड बस से आने के बाद वह आटो से रोज दफ्तर पहुंचते हैं लेकिन आज उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर अपने कार्यालय आना पडा और वह समय से भी दफ्तर नहीं पहुंच सके।

 एक कालेज छात्रा का कहना है कि उसके घर ग्रेटर कैलाश से साकेत स्थित उसके कालेज तक के लिए सीधी बस नहीं है इसलिए वह आटो पकडकर रोज कालेज पहुंचती थी लेकिन आज उसे लिफ्ट लेकर कालेज तक पहुंचना पडा।

 लेकिन एक गृहिणी का कहना है कि वह आटो रिक्शा का इस्तेमाल कम करती हैं। लेकिन उनका कहना है कि आटो रिक्शा वाले मनमानी ज्यादा करते हैं और मीटर से नहीं चलते हैं। उनका कहना है कि सरकार और आटो रिक्शा वालों के बीच के झगड़े में आम आदमी परेशान हो रहा है।

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