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तेल मूल्यों में सट्टेबाजी के खिलाफ एकजुट हुई दुनिया

तेल मूल्यों में सट्टेबाजी के खिलाफ एकजुट हुई दुनिया

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल मूल्यों में पारदर्शिता पर जोर देते हुए दुनियाभर के देशों ने कच्चे तेल के व्यापार में सट्टेबाजी के खिलाफ भारत के रूख का समर्थन किया है।
  
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा फोरम की कानकुन में आयोजित दो दिवसीय बैठक के अंत में दुनियाभर से पहुंचे 66 तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों ने खुले रूप में इसकी वकालत नहीं की हो। लेकिन सभी प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में पारदर्शिता की मांग उठाकर इसमें होने वाली सट्टेबाजी के खिलाफ भारत की मांग पर एक प्रकार से एकजुटता दिखाई है।

सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है कि ऊर्जा कारोबार का बाजार इतना पारदर्शी होना चाहिए कि वह पूरी क्षमता के साथ प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। साथ ही कारोबार के सामयिक और उचित आंकड़े उपलब्ध होने चाहिए ताकि बाजार मूल्यों की बेहतर समझ पैदा हो और बाजार नियमन संबंधी उचित कदम भी उठाए जा सकें।
  
भारत 2006 से ही कच्चे तेल कारोबार में सट्टेबाजी के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। भारत कहता रहा है कि कागज पर कच्चे तेल के सौदे वास्तविक डिलीवरी से कहीं ज्यादा हो रहे हैं। इस प्रकार के कागजी सौदों के कारण ही कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा और तत्कालीन पेट्रोलियम सचिव एमएस श्रीनिवासन कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं और इसके लिए कई बार लोगों का विरोध भी सहना पड़ा था।

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