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अभिनेता नहीं निर्देशक बनना चाहते थे अजय देवगन

अभिनेता नहीं निर्देशक बनना चाहते थे अजय देवगन

अभिनेता अजय देवगन हिंदी फिल्म जगत में अपने दमदार अभिनय से लगभग दो दशक से दर्शकों के दिल पर राज कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि वह पहले निर्देशक बनना चाहते थे।

अजय देवगन [मूल नाम विशाल देवगन] का जन्म दिल्ली में 02 अप्रैल, 1969 को हुआ था। उनके पिता वीरू देवगन हिंदी फिल्मों के नामी स्टंटमैन थे, जबकि उनकी मां वीणा देवगन ने एक-दो फिल्मों का निर्माण किया था। घर में फिल्मी माहौल के होने कारण अजय देवगन की रुचि भी फिल्मों की ओर हो गई और वह फिल्म निर्देशक बनने का सपना देखने लगे।

अजय ने स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मिठ्ठी भाई कॉलेज से पूरी की। इसके बाद वह फिल्म निर्देशक शेखर कपूर के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कुक्कु कोहली से हुई जो उन दिनों नई फिल्म फूल और कांटे के निर्माण में व्यस्त थे और एक ऐसे अभिनेता की तलाश में थे जो रुमानी भूमिका के साथ-साथ एक्शन दृश्य भी कर सके।

इस दौरान उन्होंने अजय देवगन के बारे में सुना कि वह एक्शन और नृत्य करने में माहिर है और उन्होंने उनसे फिल्म का नायक बनने की पेशकश की। अपनी पहली ही फिल्म की सफलता के बाद अजय देवगन दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। फिल्म फूल और कांटे की सफलता के बाद अजय देवगन की एक्शन हीरो के रूप में छवि बन गई।

इस फिल्म के बाद निर्माता-निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में उनकी एक्शन हीरो वाली छवि को भुनाया। निर्माताओं ने अजय देवगन को एक ऐसे नायक के रूप में पेश किया जिसे अपनी जिस्मानी ताकत पर पूरा भरोसा है और अपनी इसी ताकत के बल पर वह समाज में फैल रहे जुल्म और अत्याचार को अकेले समाप्त कर देना चाहता है। इन फिल्मों में जिगर, दिव्य शक्ति, प्लेटफार्म शक्तिमान और एक ही रास्ता जैसी फिल्में शामिल थीं।

नब्बे के दशक में अजय देवगन पर यह आरोप लगने लगे कि वह केवल मारधाड़ और एक्शन से भरपूर फिल्में ही कर सकते है। उन्हें इस छवि से बाहर निकालने में निर्माता-निर्देशक इंद्र कुमार ने मदद की। उन्होंने अजय देवगन को लेकर 1997 में फिल्म इश्क का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने अजय देवगन से हास्य अभिनय कराकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

वर्ष 1998 अजय देवगन के सिने कैरियर का महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उन्हें महेश भटृ की फिल्म जख्म में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में वह अपने दमदार अभिनय से न सिर्फ दर्शकों, बल्कि समीक्षकों का दिल जीतने में भी सफल रहे। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वर्ष 1998 में ही अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और हिट फिल्म मेजर साब प्रदर्शित हुई। इस फिल्म में उन्हें सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के साथ पहली बार काम करने का अवसर मिला लेकिन अजय देवगन अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे।

वर्ष 1999 में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। सलमान खान और ऐश्वर्या राय जैसे मंझे हुए सितारों की मौजूदगी में भी अजय देवगन ने अपने संजीदा किरदार को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए वह फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित भी किए गए।

वर्ष 1999 में अजय देवगन को अपने पिता वीरू देवगन के बैनर तले बनी फिल्म 'हिंदुस्तान की कसम' में काम करने का अवसर मिला। हालांकि फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई, लेकिन फिल्म में अजय देवगन ने अपने निभाए दोहरे किरदार से दर्शकों को रोमोंचित कर दिया।

वर्ष 2000 में अजय देवगन ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रख दिया और 'राजू चाचा' का निर्माण किया, लेकिन कमजोर पटकथा और निर्देशन के कारण टिकट खिड़की पर नकार दी गई। इसके बाद उन्होंने 2008 में फिल्म 'यू मी और हम' का निर्माण और निर्देशन किया। वर्ष 2009 में अजय देवगन के बैनर तले बनी फिल्म 'ऑल दी बेस्ट' प्रदर्शित हुई जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई।

वर्ष 2002 में अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म 'कंपनी' प्रदर्शित हुई। राम गोपाल वर्मा के बैनर तली बनी इस फिल्म में वह अंडर वर्ल्ड डान की भूमिका में दिखाई दिए। इस फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए वह फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार के लिए नामांकित भी किए गए।

वर्ष 2002 में ही अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म द लीजेंड ऑफ भगत सिंह प्रदर्शित हुई। राज कुमारी संतोषी निर्देशित इस फिल्म में उन्होंने भगत सिंह के किरदार को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर के समीक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही वह अपने सिने कैरियर में दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

वर्ष 2003 में अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म गंगाजल प्रदर्शित हुई। बिहार में आपराधिक पृष्ठभूमि पर बनी प्रकाश झा की इस फिल्म में अजय देवगन ने पुलिस अधीक्षक की भूमिका निभाई जो प्रांत में फैले अपराध को समाप्त कर देता है। हांलाकि इसके लिए उसे काफी अड़चनों का सामना करना पड़ता है लेकिन अंत में वह विजयी होता है।

वर्ष 2006 में अजय देवगन के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म ओमकारा प्रदर्शित हुई। विशाल भारद्धाज के निर्देशन में शेक्सपियर के बहुचर्चित नाटक ओथेलो पर आधारित इस फिल्म में अजय देवगन टाइटल भूमिका में दिखाई दिए और अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का दिल जीतने में सफल रहे और फिल्म को सुपरहिट बना दिया।

अजय देवगन के सिने कैरियर में उनकी जोडी़ अभिनेत्री काजोल के साथ खूब जमी। यह फिल्मी जोडी़ सबसे पहले 1995 में प्रदर्शित फिल्म 'हलचल' में नजर आई। इसके बाद इस जोड़ी को कई फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों में काम करने का अवसर दिया। इन फिल्मों में 'गुंडाराज', 'इश्क', 'प्यार तो होना ही था', 'दिल क्या करे', 'राजू चाचा' और 'यू मी और हम' जैसी फिल्में शामिल है। वर्ष 1999 में अजय देवगन और काजोल ने शादी कर ली।

अजय देवगन ने दो दशक लंबे सिने कैरियर में कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता, लेकिन दुर्भाग्य से किसी भी फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर से सम्मानित नहीं किए गए। हांलाकि नाजायज [1995], जख्म [1998], हम दिल दे चुके सनम [1998], कंपनी [2002] और गंगाजल [2003] के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किए गए।

अजय देवगन अपने सिने कैरियर में अब तक लगभग 75 फिल्मों में काम कर चुके है। उनकी अभिनीत कुछ अन्य उल्लेखनीय फिल्में है, बेदर्दी [1993], दिलवाले, विजय पथ, सुहाग [1994], हकीकत, जंग [1995], जान, दिलजले [1996], इतिहास [1997], कच्चे धागे, होगी प्यार की जीत [1998] तक्षक [1999], लज्जा, हम किसी से कम नहीं [2001], दीवानगी, भूत [2002], जमीन [2003], रेनकोट [2004], काल, अपहरण [2005], गोलमाल [2006] राम गोपाल वर्मा की आग, हल्ला बोल [2007], गोलमाल रिटर्नस [2008], लंदन ड्रीम्स [2009] अतिथि तुम कब जाओगे [2010] आदि।

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