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गैर पारंपरिक फिल्मों की ओर झुकाव: राहुल बोस

गैर पारंपरिक फिल्मों की ओर झुकाव: राहुल बोस

'झंकार बीट्स' और 'प्यार के साइड इफेक्ट्स' जैसी लोकप्रिय व्यवसायिक फिल्में दे चुके बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता राहुल बोस कहते हैं कि उनका झुकाव गैर पारंपरिक फिल्मों की ओर है।

बयालीस वर्षीय राहुल ने कहा, ''मैं व्यवसायिक फिल्मों से दूर दिखता हूं क्योंकि मेरी प्राथमिकता हमेशा से विश्व सिनेमा रही है। फिर वह 'स्पलिट वाइड ओपन' फिल्म रही हो या 'इंग्लिश, अगस्त' मेरा झुकाव हमेशा गैर पारंपरिक सिनेमा की ओर रहा है।''

उन्होंने कहा, ''एक और सच्चाई यह है कि मेरे पास अक्सर व्यवसायिक फिल्मों के प्रस्ताव नहीं आते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं न तो मुख्यधारा के कलाकारों की तरह दिखता हूं और न ही मुझमें उनकी तरह सेक्स अपील या नृत्य की योग्यता है। इसलिए मैं खुद को ऐसी भूमिकाओं की ओर नहीं धकेलना चाहता हूं जिनमें मैं खुद मूर्ख नजर आऊं।''

अभिनेता का कहना है कि वह ऐसे कुछ कलाकारों को जानते हैं, जिन्होंने कला सिनेमा में अच्छा काम किया है लेकिन जब उन्होंने व्यवसायिक सिनेमा में अपना करियर बनाना चाहा तो उन्होंने स्वयं के साथ मूर्खता की। राहुल कहते हैं कि उनके लिए किसी फिल्म में काम करने के लिए निर्देशक के नाम की अपेक्षा फिल्म की पटकथा और उसका दृष्टिकोण महत्व रखता है।

अभिनेता ने 1994 में देव बेनेगल की फिल्म 'इंग्लिश, अगस्त' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने बॉलीवुड की 'तक्षक' और 'सिलसिले' जैसे मुख्यधारा की फिल्मों में काम किया। इसके अलावा उन्हें 'बॉम्बे बॉयज', 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' और '15 पार्क एवेन्यू' जैसी कला फिल्मों के लिए भी जाना जाता है।

'टाइम एशिया' पत्रिका ने उन्हें भारतीय कला सिनेमा का सुपरस्टार बताया है। वह अपर्णा सेन के निर्देशन में एक और कला फिल्म 'द जेपनीज वाइफ' में अभिनय कर रहे हैं।  राहुल दो फिल्मों में अभिनय करने के साथ अपने निर्देशन में फिल्म 'मॉथ स्मोक' बनाने के लिए धन जुटाने की भी कोशिश कर रहे हैं। मोहसिन हामिद की किताब पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग इस साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।

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