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'गणित के नोबेल' की दौड़ में तीन भारतवंशी

गणित का नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले फील्ड्स पदक के लिए इस बार भारतीय मूल के तीन गणितज्ञों के नाम पर विचार किया गया है और अगस्त में हैदराबाद में आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ कांग्रेस (आईसीएम) में विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
   
अब तक यह पुरस्कार किसी भारतीय गणितज्ञ को नहीं मिला है लेकिन सूत्रों के अनुसार इस वर्ष के फील्ड्स पुरस्कार के लिए तीन भारतवंशी गणितज्ञों के नाम पर विचार किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ कांग्रेस के समन्वयक डॉ. एमएस रघुनाथन के अनुसार इस बार कांग्रेस में दिए जाने वाले फील्ड्स पदक के अभ्यर्थियों में तीन भारतवंशियों के नाम पर भी विचार किया गया है।
   
हालांकि उन्होंने कहा कि इन गणितज्ञों के नाम बाद में ही बताए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 19 से 27 अगस्त के बीच हैदराबाद में आयोजित होने जा रही कांग्रेस के उद्घाटन समारोह में फील्ड्स समेत अन्य पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
   
गणित के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार के तौर पर फील्ड्स पदक आईसीएम के उद्घाटन समारोह में प्रदान किए जाते हैं। यह पुरस्कार केवल 40 वर्ष तक के गणितज्ञों को प्रदान किया जाता है और कांग्रेस का आयोजन हर चार साल बाद होने के कारण इसे भी चार साल में एक बार प्रदान किया जाता है। हालांकि एक बार में चार फील्ड्स पदक तक प्रदान किए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि गणित के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान नहीं किया जाता। हालांकि फील्ड्स सम्मान में पुरस्कार राशि नोबेल के मुकाबले मामूली है लेकिन गणितज्ञ इसे गणित का नोबेल मानते हैं।

फील्ड्स पुरस्कार की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय गणित संघ (आईएमयू) ने की थी, जिसके तत्वावधान में आईसीएम का आयोजन होता है। पुरस्कार की शुरुआत कनाडाई गणितज्ञ जान्स चार्ल्स फील्ड्स के नाम पर की गई। पहली बार 1936 में आयोजित कांग्रेस में इसे प्रदान किया गया।
   
आईसीएम के उद्घाटन समारोह में दो अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। नेवनलीना पुरस्कार (कंप्यूटर साइंस के गणितीय पहलुओं पर काम करने के लिए) और गॉस पुरस्कार (गणित के बाहरी अनुप्रयोगों में गणितीय योगदान के लिए) दिया जाता है।
   
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई के स्कूल ऑफ मेथमेटिक्स के डॉ. रघुनाथन ने बताया कि हैदराबाद कांग्रेस में जाने-माने अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ एसएस चर्न के नाम पर एक नए पुरस्कार की शुरुआत भी की जाएगी।
   
उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भारतीय को ये पुरस्कार नहीं मिले हैं। हालांकि भारतीय मूल की गणितज्ञ मधुसूदन को 2002 का नेवनलीना पुरस्कार प्रदान किया गया था।

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