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जस्टिस सोमित्र सेन पर महाभियोग की पहल

ोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस सोमित्र सेन पर महाभियोग चलाने के लिए राज्यसभा के 58 सांसदों ने पहल की है। सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को इस संबंध में याचिका दे दी। सेन पर जज बनने से पूर्व 1में कोर्ट का रिसीवर रहते हुए 23 लाख रुपये का सरकारी धन अपने खाते में जमा करने का आरोप है। मुख्य न्यायाधीश केाी बालाकृष्णन ने पिछले दिनों जस्टिस सेन के खिलाफ इनहाउस जांच कमेटी से कार्रवाई थी जिसमें उन्हें सरकारी धन की हेराफेरी का दोषी पाया गया। मुख्य न्यायाधीश ने उनसे इस्तीफा देने को कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद गत वर्ष अगस्त माह में मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सेन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब मुख्य न्यायाधीश के आग्रह पर किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाने की कार्यवाही की जा रही है। इससे पूर्व 1में आजाद भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वी रामास्वामी पर संसद में महाभियोग चलाया गया था। उन पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रहने के दौरान प्रशासनिक और वित्तीय शक्ितयों का दुरुपयोग करने का आरोप था। यह महाभियोग मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश पर नहीं बल्कि लोकसभा की ओर से स्वयं लाया गया था। लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इसके पक्ष में मतदान नहीं किया और यह विफल हो गया था। 1में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शिवप्रसाद को तत्कालीन गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने फेडरल कोर्ट की सिफारिश पर हटाया था। राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति हमीद अंसारी कोदी गई याचिका में लगभग सभी पार्टिेयों के सदस्यों ने दस्तखत किए हैं। इनमें भाजपा, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी, आरोडी, टीडीपी, एआईडीएमके, तथा जेडीयू के सदस्य हैं। याचिका पर दस्तखत करने वालों में सीपीएम के सीताराम येचुरी, वृंदा करात, सीपीआई के डी राजा, जेडीयू के शरद यादव, भाजपा की सुषमा स्वराज और एसए अहलूवालिया शामिल हैं। प्रक्रिया : संविधान के अनुच्छेद 217 (1) तथा 124 (4) के अनुसार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज को महाभियोग के जरिये ही हटाया जा सकता है। इसके लिए राज्यसभा के 50 या फिर लोकसभा के 100 सदस्यों की ओर से याचिका देनी पड़ती है। महाभियोग कार्यवाही का यह पहला कदम हैं। इस याचिका पर जांच कमेटी का गठन होगा जो जज के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करगी। आरोपी जज को अपने पक्ष में सफाई देने को मौका दिया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के बाद मामला संसद में जाएगा जहां दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में इसका दो तिहाई बहुमत (सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या) से पास होना आवश्यक है। महाभियोग पारित होने के बाद राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर कर जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

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  • Web Title: जस्टिस सोमित्र सेन पर महाभियोग की पहल