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मोदी का फिर पैंतरा मायाबेन पर शिकंचाा

गुजरात दंगा मामले में अग्रिम जमानत पर चल रहीं गुजरात की उच्च शिक्षा मंत्री मायाबेन कोडनानी की जमानत अर्जी खारिा करने की अपील का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हाईकोर्ट में 24 फरवरी को इसपर सुनवाई होनी है। सवाल यह है कि जमानत अर्जी खारिा कराने के लिए एसआईटी को हाईकोर्ट जाने की अनुमति मोदी सरकार ने क्यों दी? क्या सरकार अपनी ही मंत्री से निजात पाना चाहती है? बहरहाल इन सवालों के जवाब कानूनी और राजनीतिक दोनों पहलू से दिलचस्प हैं। कानूनी पहलू के अनुसार, नारोड़ा-पाटिया और नरोड़ा गांव नरसंहार मामले में एसआईटी ने मायाबेन को फरार घोषित किया और इसके बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए मायाबेन ने अहमदाबाद की सेशंस कोर्ट से अग्रिम जमानत ली तो एसआईटी ने जमानत खारिा कराने के लिए हाईकोर्ट जाने की इजाजत ली और सरकार ने फौरन इजाजत दे दी। इस मामले में तीन लोगों की ओर से मायाबेन की जमानत रद्द कराने की अर्जी लगाने वाले वकील एस एच अय्यर कहते हैं कि यह अनूठा मामला है। सरकार मायाबेन के खिलाफ है, सरसरी तौर पर दिखता है कि सरकार इससे संतुष्ट है कि मायाबेन की दंगों में भूमिका थी और गवाहों के बयान और फोन की गतिविधि भी सरकार की संतुष्टि को पुष्ट करती है। इसका राजनीतिक पहलू यह है कि मायाबेन मोदी की उतनी कट्टर समर्थक नहीं रही हैं। ऐसे में मोदी मायाबेन से निजात पाने में कोई परहेा नहीं करंगे।

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  • Web Title: मोदी का फिर पैंतरा मायाबेन पर शिकंचाा