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बच्चों को आसानी से शिकार बनाता है स्वाइन फ्लू

बच्चों को आसानी से शिकार बनाता है स्वाइन फ्लू

इंफ्लूएंजा-ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू पर एक सरकारी सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि इस रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित 5 से 19 साल के बीच के लोग हुए हैं और सबसे अधिक मौतें दिसंबर में हुई जबकि सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले राजधानी दिल्ली से आए थे।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय द्वारा स्वाइन फ्लू फैलने के महीनों मई, 2008 से इस साल फरवरी तक की अवधि के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
    
अधिकारी ने बताया कि इस सर्वेक्षण में पता चला है कि इस अवधि में इस रोग के एक लाख 28 हजार 627 संदिग्ध मामले सामने आए जिनमें 29 हजार 652 यानी 23 प्रतिशत की पुष्टि हो पाई। 5 प्रतिशत यानी 1372 रोगियों की मौत हुई और 95 प्रतिशत यानी 28,280 मामलों में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और कुछ में सुधार हो रहा है।

इस अवधि के दौरान इस रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित 5 साल से 19 साल के 10 हजार 831 बच्चों हुए। इनमें लड़कों की संख्या 6,325 और लड़कियों की संख्या 4,506 थी। दूसरा स्थान 20-39 साल, तीसरा स्थान 40-59 साल, चौथा स्थान 5 साल से कम आयु और पांचवां स्थान 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का था।

अधिकारी ने बताया कि इस अवधि में सबसे ज्यादा 7,708 रोगियों की मौत अकेले गत दिसंबर में हुई जबकि इसके बाद 6,017 मौतें सितंबर में और 4,290 मौतें नवंबर में हुई। इस साल जनवरी में 1917 और फरवरी में 847 रोगियों की मौत हो चुकी है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई कि इस अवधि के दौरान स्वाइन फ्लू से सबसे ज्यादा 2,096 मौतें गत 7 से 13 दिसंबर के सप्ताह में हुईं और सबसे कम 161 मौतें इस साल 22 से 28 फरवरी के दौरान हुई।

सर्वेक्षण में इस अवधि के अंतिम 30 दिन के दौरान यह बात सामने आई कि स्वाइन फ्लू के करीबन 70 प्रतिशत मामले देश के प्रमुख शहरों से आए हैं। इनमें पहला स्थान पुणे का है जहां इस अवधि में 235 मामले सामने आए। उसके बाद बेंगलुरु से 74 मामले, जोधपुर से 58 मामले, अहमदाबाद से 51 मामले, दिल्ली से 42 मामले, वड़ोदरा से 38 मामले, नागपुर से 28 मामले, नासिक और लातूर से 23-23 मामले और जयपुर से 18 मामले सामने आए हैं।

इसी तरह अंतिम 30 दिनों की अवधि में क्लिनिकल परीक्षण किए गए कुल 1,625 मामलों में सबसे ज्यादा 1,033 यानी 76 प्रतिशत मामले सर्दी, जुकाम और बुखार के थे। जबकि 256 मामले बुखार और सर्दी जुकाम के, 224 मामले सर्दी जुकाम और गला खराब के, 69 मामले केवल सर्दी जुकाम, 53 मामले बुखार और सांस लेने में कठिनाई, 14 मामले उल्टी होने और मामले अन्य बुखार के पाए गे।


राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामले देख रहे नोडल अधिकारी डॉ. आरपी वशिष्ठ ने बताया कि जैसे-जैसे मौसम में तापमान ज्यादा होता जा रहा है तो इसके वायरस के संक्रमण में कमी आ रही है क्योंकि इसका वायरस अधिक तापमान नहीं सह पाता। यही कारण है कि सबसे ज्यादा मामले दिसंबर और इस रोग से मौतें भी इसी महीने के दौरान हुई जब सबसे कम तापमान रहा।

डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि दिल्ली में सबसे अधिक संदिग्ध मामले सामने आने का कारण यह है कि यहां लोगों में इस रोग के प्रति जागरूकता सबसे अधिक है और इसके साथ जांच और इलाज सुविधाएं भी पर्याप्त संख्या में है। दूसरे राज्यों के लोग भी यहां अधिक संख्या में आते हैं।

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