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भारत के माओवादियों से हमारे संगठनात्मक संबंध नहीं: प्रचंड

भारत के माओवादियों से हमारे संगठनात्मक संबंध नहीं: प्रचंड

नेपाल के शीर्ष माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने सोमवार को कहा कि कम्युनिस्ट सोच का आधार होने के कारण दुनिया के किसी भी कोने में मौजूद माओवादियों का एक दूसरे से बुनियादी विचाराधार के स्तर पर संबंध हो सकता है, लेकिन ये आरोप सरासर बेबुनियाद हैं कि भारत में सक्रिय माओवादियों से हमारे संबंध हैं।

एकीकृत सीपीएन माओवादी [यूसीपीएन-एम] के अध्यक्ष प्रचंड की यहां भारतीय पत्रकारों के दल से हुई बातचीत में पूछा गया था कि नेपाल के माओवादियों का भारत में प्रतिबंधित और हिंसा पर उतारु माओवादियों से क्या कोई संबंध है। प्रचंड ने कहा कि कम्युनिस्ट सोच के कारण कहीं न कहीं विचाराधात्मक स्तर पर माओवादियों के बीच आपसी रिश्ता हो सकता है। और ऐसा भारत के मामले में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मौजूद माओवादी विचाराधारा के लोगों के साथ हो सकता है।

लेकिन उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारे भारत में सक्रिय माओवादियों से संगठनात्मक या भौतिक रूप से कोई संबंध नहीं हैं और नेपाल के माओवादियों के भारत के माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप सरासर निराधार हैं और यह गलत प्रचार है। एक दशक लंबा सशस्त्र संघर्ष छोड़कर संविधान सभा के चुनाव के जरिये सरकार बनाने के बाद आठ महीने प्रधानमंत्री पद पर रहे प्रचंड ने कहा कि नेपाल में हमने बातचीत का रास्ता अपनाया और हम भारत में ऐसा ही चाहते हैं।

प्रचंड ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत में भी माओवादियों की वहां की सरकार से बातचीत हो। हम चाहते हैं कि वार्ता के जरिये समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकले। यह पूछने पर कि क्या वह मानते हैं कि उनके प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान भारत के बजाए चीन के नेपाल के साथ रिश्ते ज्यादा गहरे हो गये, प्रचंड ने इस पर सीधा जवाब टालते हुए कहा कि नेपाली जनता और उसके राष्ट्र के हित सर्वोपरि हैं। नेपाल के सर्वोच्च हितों के लिये देश का दोनों, भारत और चीन, से अच्छे संबंध होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत से नेपाल के जैसे संबंध हैं, चीन के साथ रिश्ते उससे अलग हैं। हम मानते हैं कि दोनों देशों के साथ हमारे राजनीतिक संबंध मजबूत और अच्छे हों। दोनों की आर्थिक तरक्की का फायदा नेपाल को भी मिलना चाहिये। संविधान रचना की नई सीमा 28 मई के बारे में उन्होंने कहा कि निर्धारित समय तक संविधान रचना का काम पूरा हो जाने की हमें उम्मीद है। इस दिशा में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत चल रही है।

स्वामी रामदेव के योग शिविर में आने के निमंत्रण को कैसे स्वीकार किया, इस बारे में प्रचंड ने कहा कि मैं रामदेव से पहली बार दिल्ली में मिला था और हमारे बीच दिलचस्प बातचीत हुई थी। योगगुरु का कहना था कि उनके और कम्युनिस्टों के विचार एक बिंदु पर मिलते हैं और वह है समृद्धि। उन्होंने कहा कि फर्क सिर्फ इतना है कि जब कम्युनिस्ट बोलते हैं तो कोई पूर्वाग्रह बन जाता है और जब स्वामी बोलते हैं तो लोग उन पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

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