DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नरेगा भी काम नहीं देता, भूखमरी के मुहाने पर 'बंधना'

नरेगा भी काम नहीं देता, भूखमरी के मुहाने पर 'बंधना'

जिन्दा तो वह भी है मगर भीख में मिली पड़ोसियों की रोटी खाकर। कभी-कभी भूखे पेट रात बिताना उसकी नियत बन चुकी है। उसका कोई मददगार नहीं है। अधिकारियों से गुहार लगाना बेकार साबित हुआ है।

जॉबकार्ड तो है, लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में अब तक एक भी दिन का काम नहीं दिया गया। भीख मांगने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। ये हालात गरीबी और विकलांगता का दंश झेल रहे उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में तेन्दुरा गांव के दलित 'बंधना' के हैं, जो कभी भी भूख के कारण दम तोड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में तेन्दुरा गांव के दलित बंधना (48) की हालत देख हर किसी को तरस आ जाए। खुद दोनों पैरों से विकलांग और पत्नी बुधिया (45) नेत्रहीन। न सिर छिपाने के लिए आशियाना और न ही एक विश्वा जमीन।

एक छोटी-सी कच्ची कोठरी में गुजर बसर कर रहें हैं। इस विकलांग दम्पत्ति को गांव में कोई बेगार करने को भी नहीं पूछता। मनरेगा में काम के लिए जॉब कार्ड तो बना है, लेकिन विकलांगता की वजह से गांव पंचायत से अब तक एक भी दिन का काम नहीं मिला। समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली पेंशन भी कई महीने से नहीं मिली। उसके नाम से जारी अन्त्योदय राशन कार्ड से कोटेदार का ही भला होता है। वह पड़ोसियों के घर से बासी, तेवासी रोटियों की भीख मांग कर अपना व पत्नी का पेट भर रहा है।

हालात यह हो गए हैं कि बंधना व उसकी पत्नी कभी भी भूख से तड़प कर दम तोड़ सकते हैं या फिर मुफलिसी की जिन्दगी से ऊब कर आत्महत्या कर सकते हैं। उसने बताया कि इस बदतर जिन्दगी से हार गए हैं। जहर मिल जाए तो खाकर जान दे दें। अक्सर भूखे पेट रात बीतती है। ग्राम प्रधान श्यामबाबू मिश्रा का कहना है कि मियां-बीवी श्रम करने में अक्षम हैं, बिना काम पंचायत क्या मदद करे।

उपजिलाधिकारी रामसहाय यादव ने बताया कि मनरेगा में बिना काम मजदूरी देने का प्रावधान नहीं है, फिर भी मानवीय संवेदना से खुद मदद करने पहुंचेंगे। भूख की त्रासदी से मौत नहीं होगी। आर्थिक मदद के लिए शासन को लिखा जाएगा।

जिलाधिकारी बांदा रंजन कुमार ने बताया कि अधिकारियों की टीम भेजकर जांच कराएंगे और यथा संभव मदद होगी। मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवकुमार मिश्र का कहना है कि बांदा में कई ऐसे परिवार हैं, जो बेरोजगारी व आर्थिक तंगी से मौत के मुहाने पर खड़े हैं। भूख से मौत के बाद प्रशासन मुकर जाता है। पिछले साल नहरी व पडुई गांवों में ऐसा ही हुआ था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नरेगा भी काम नहीं देता, भूखमरी के मुहाने पर 'बंधना'