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अर्थशास्त्री हैं फिल्मकार शेखर कपूर!

अर्थशास्त्री हैं फिल्मकार शेखर कपूर!

हक़ीक़त को पर्दे पर उतारने वाले अंतर्राष्ट्रीय फिल्मकार शेखर कपूर अपने ब्लॉग पर फिल्मों से अधिक आधुनिक मुद्दों पर विचार रखते हैं। इन दिनों वो आर्थिक मामलों पर टिप्पणी कर रहे हैं, जिससे उनके भीतर छुपे अर्थशास्त्री का पता चलता है।

शेखर ने अपने ब्लॉग 'शेखर कपूर डॉट कॉम' में वैश्विक आर्थिक मंदी के बारे में टिप्पणी की है, जिसका शीर्षक है 'उपभोक्तावाद का अर्थशास्त्र'।  उन्होंने इस संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आर्थिक पैकेज की चर्चा की। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए अमेरिका ने उपभोक्तावाद को बढ़ावा देने का जो काम किया है, उससे समस्या का समाधान निकलता नज़र नहीं आता है।

शेखर कहते हैं कि अमेरिका में क्रिसमस के दौरान होने वाली ब्रिकी से अर्थव्यवस्था की स्थिति मापी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत भी कुछ-कुछ इसी मॉडल को अपनाने में लगा है। शेखर ने कहा, ''भारत में वाहनों की बिक्री में बढोतरी को इस नज़र से देखा जा रहा है मानों अर्थव्यवस्था ऊंचाई को छू रही है।''

शेखर ने कहा कि अत्यधिक उपभोक्तावाद किसी एक देश की समस्या नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक समस्या है। उन्होंने कहा कि यह दुनिया की मूल समस्या है। फिल्मकार का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मॉडल इसी अत्यधिक उपभोक्तावाद पर आधारित है। उन्होंने इस पर चिंता जताई है।

शेखर अर्थव्यवस्था के अलावा खेल पर भी चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को लेकर एक बहस की शुरुआत की है। वह बताते हैं, ''हम बहस कर रहे हैं कि क्या आईपीएल ही असली क्रिकेट है या फिर यह क्रिकेट के स्वरूप को ही बरबाद कर देगा। वैसे इसने यह तो सिद्ध कर दिया कि इससे पैसे बहुत बनाए जा सकते हैं साथ ही इसमें मनोरंजन भी ख़ूब होता है।''

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