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डॉक्टरों को बैठा कर दिया वेतन

आयुष में हुई गड़बड़ियों की परतें अब खुलने लगी हैं। अंतिम कैडर डिवीजन के बाद बिहार से आये आयुष चिकित्सकों के पदस्थापन और सेवा विनियमन में भी पैसे के लेन-देन का मामला सामने आया है। इस बाबत राज्यपाल की सलाहकार सह स्वास्थ्य विभाग की प्रभारी सुनीला बसंत को सूचना दी गयी है। अब यह मामला जांच के घेर में है।ड्ढr सूत्रों के अनुसार बिहार से आये चिकित्सक अपना योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे। प्रतीक्षारत चिकित्सकों को 15 दिन के भीतर ही पोस्टिंग करने का प्रावधान है। ऐसा नहीं होने पर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है। करीब एक साल तक इन डॉक्टरों को बिना काम का वेतन मिला। जिन डॉक्टरों ने लेन-देन किया, उनका पदस्थापन सिंगल फाइल खोलकर करा दिया गया। जिन्होंने नहीं दिया, उन्हें लटकाये रखा गया।ड्ढr तत्कालीन प्रशाखा पदाधिकारी ने कई महीने बीत जाने के बाद अलग-अलग 38 फाइल तैयार कर एक-एक पदाधिकारी के सेवा विनियमन का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा, जबकि आयुष विभाग में चिकित्सकों के आवश्यकता से पांच गुणा पद रिक्त थे। नियमत: एक साथ और एक ही फाइल में सभी प्रतीक्षारत पदाधिकारियों की सेवा विनियमन का प्रस्ताव सचिवालय अनुदेश और कार्यपालिका नियमावली के तहत दिया जाना था। सेवा विनियमन प्रस्ताव पर आंतरिक वित्तीय सलाहकार की सहमति नहीं थी। सभी आदेश बिना वित्त विभाग की सहमति के निर्गत हुए। इस मामले में तत्कालीन प्रशाखा पदाधिकारी विजय कुमार दत्त आरोपों के घेर में हैं। दत्त पर लगे आरोपों के कारण ही मंत्री व विभागीय सचिव ने उनकी सेवा स्वास्थ्य विभाग से कार्मिक को वापस दे दी थी।

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