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शाकाहार

शाकाहार के लिए अभियान चलानेवालों के लिए यह सबक है। सरकार के एक समाजवादी मंत्री ने अपने स्टाफ को एक ही झटके में मांसाहारी से शाकाहारी बना दिया। स्टाफ ने कसम खाई-अब मांसाहार नहीं लेंगे। हुआ यह कि वसंत पंचमी के दिन मंत्रीजी अपने क्षेत्र जा रहे थे। दरभंगा-मुजफ्फरपुर के बीच किसी लाइन होटल में काफिला भोजन के लिए रूका। बिल जब मंत्रीजी के पास पहुंचा तो रकम देखकर नाराज हो गए। देखा कि लोगों ने मुर्गा पर हाथ साफ कर दिया है। वसंत पंचमी के दिन मुर्गा? मंत्रीजी ने धमकी दी-हमार साथ रहना है तो शाकाहारी बनिए।ड्ढr ड्ढr मजबूरीड्ढr मंत्रीजी को रास्ते का अच्छा ज्ञान है। आपको वे राज्य भर की सड़कों का हाल और दूरी बता देंगे। यह ज्ञान उन्हें मजबूरी में हासिल हुआ है। सचिव महोदय कड़क हैं। अपने स्तर से निर्णय लेते हैं। मंत्रीजी की दखलंदाजी हुई तो फाइलें सीधे एक नम्बर में पहुंच जाती हैं। मंत्रीजी के पास दो ही रास्ता बचा था। पहला-सचिव से झगड़ा कर लें। दूसरा-सचिवालय का मोह छोड़ दें। उन्होंने दूसरे रास्ते का चुनाव किया। फायदा ही फायदा है। क्षेत्र में अधिक समय देते हैं। जनता खुश। इधर सचिव भी खुश रहते हैं और इसी खुशी में मंत्रीजी का छोटा-मोटा काम भी कर देते हैं।ड्ढr ड्ढr फर्क नहींड्ढr मंत्रीजी की सेहत पर विरोध का फर्क नहीं पड़ता है। उनके जिम्मे पंचायती का मामला है। उत्तर बिहार के एक जिले में पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन में गए थे। बोलने की बारी आई तो मुखियाजी लोगों पर सीधे निशाना साध दिया। बोले-बीपीएल और इंदिरा आवास योजना में मुखिया लोग घूस लेते हैं। कुछ देर तक तो लोगों को बात समझ में नहीं आई। फिर किसी ने कहा-अर, ये तो हमलोगों को चोर कह रहे हैं। हल्ला मचा। मंत्रीजी जरा भी विचलित नहीं हुए। उल्टे उन्होंने हल्ला करनेवालों को उत्साहित किया-और जोर से हल्ला कीािए। हम भी हल्ला के जोर पर ही यहां तक पहुंचे हैं।

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  • Web Title: राजदरबार