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नेट पर बेखबर हुए तो ठग लिए जाएँगे

अगर आप समय के अभाव में ई-शापिंग पर निर्भर हैं तो खबरदार। दुनियाभर में कई ऐसे इंटरनेट ठगों ने वेबसाइट लांच कर अपना संजाल फैला लिया है जिनके झाँसे में आकर रोाना सैकड़ों लोग लुट रहे हैं। पूरी तरह से फर्ाी इन साइटों की बातों में आकर ग्राहक अपने क्रेडिट व डेबिट कार्ड का विवरण भर देता है, फिर इस विवरण से ही उनके खातों से रकम निकल जाती है और वे पुलिस थानों के चक्कर ही लगाते रह जाते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कमें इस अपराध को ‘फिशिंग’ कहा जाता है। आँकड़ों के मुताबिक विश्व में हर महीने 28 हाार फिशिंग साइट चिह्न्ति हो रही हैं। इसके जरिए सबसे ज्यादा नुकसान आर्थिक सेवाओं को पहुँच रहा है। हालाँकि भारत में अभी यह अपराध एक प्रतिशत से भी कम है। बैंकों में होने वाली इस तरह की धोखाधड़ी, उनसे बचने के उपाय और जाँच पर शनिवार को पुलिस लाइन में आईसीआईसीआई बैंक द्वारा आयोजित सेमिनार में विस्तृत चर्चा हुई।ड्ढr सेमिनार में आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड के जीएम नंद कुमार सर्वदे ने कहा कि साइबर क्राइम के तहत सबसे बड़ी चुनौती फिशिंग ही है। इस अपराध ने बैंकों के अफसरों के माथे पर पसीना ला दिया है। क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ गया है। डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है। विदेश में इन्टरनेट का इस्तेमाल 70 प्रतिशत लोग करते हैं, दूसरे स्थान पर चीन है जबकि भारत में अब भी 3.5 प्रतिशत लोग ही इन्टरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वालों की संख्या के आधार पर भारता का पाँचवा स्थान है। दूसरे देशों की तरह यहाँ भी आने वाले समय में साइबर क्राइम बढ़ेगा। साइबर कैफे खुलने से इनका इस्तेमाल और बढ़ गया है। बैंक के ही एक अधिकारी राजनीश खन्ना ने फिशिंग पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया और बताया कि यह कितने तरीकों से खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बताया कि नेट बैंकिंग करते समय बहुत सावधानी से अपना आईडी व पासवर्ड भरना चाहिए। सेमिनार में बैंक के सिद्धार्थ बंसल ने क्रेडिट कार्ड की धोखाधड़ी और विवेक पाल ने आर्थिक अपराध पर प्रस्तुतीकरण किया। इससे पहले सेमिनार का उद्घाटन आईाी जेल सुलखान सिंह ने किया।ड्ढr फिशिंग से कैसे बचेंड्ढr कोई बैंक ई-मेल से बैंक खाते अथवा क्रेडिट कार्ड का विवरण नहीं माँगता है। अगर कभी खाते का विवरण माँगने वाला कोई ईमेल मिले तो समझ लें कि जालसाजी है। क्या करें, क्या न करेंड्ढr -अपने खाते या क्रेडिट कार्ड के लॉग इन व पासवर्ड का विवरण न देंड्ढr -कोई भी वेबसाइट लॉग ऑन करते समय हमेशा साइट का पूरा नाम लिखेंड्ढr -लॉग इन पेज पर चेक कर लें कि वेबसाइट का पूरा पता लिखा है, जसे ‘ँ३३स्र्२: ’ होना चाहिए न कि ‘ँ३३स्र्: ’ड्ढr -उक्त सारे विवरण चेक करने के बाद ही अपना यूजर आईडी व लॉगइन पासवर्ड भरना चाहिए साइबर क्राइम की तफ्तीश के लिए मैनुअल बनाना होगा : सुलखान सिंहड्ढr वरिष्ठ संवाददाता लखनऊड्ढr नेट बैंकिंग के दौरान ‘धोखाधड़ी, उनसे बचने के उपाय और जाँच’ पर आईसीआईसीआई बैंक द्वारा आयोजित सेमिनार के मुख्य अतिथि आईाी सुलखान सिंह ने कहा कि यूपी पुलिस बहुत बड़ी फोर्स है। इस तरह के साइबर क्राइम को रोकने के लिए पूरी फोर्स को प्रशिक्षित करना बहुत मुश्किल है। लिहाजा बैंक विशेषज्ञों को तफ्तीश व अह्म जानकारियों का एक मैनुअल बनाकर यूपी पुलिस को भेजना चाहिए। महाराष्ट्र में ऐसा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ करोड़ की डकैती, लूट होती है तो हो-हल्ला मच जाता है। पर जब ई-फ्राड से लाखों-करोड़ों की धोखाधड़ी हो रही, इस पर कोई शोर नहीं मचाता। पीड़ित व्यक्ित भी उतना अलर्ट नहीं होता है। जबकि इस तरह के फ्रॉड अपनी जागरूकता से ही काफी हद तक कम किए जा सकते हैं। डीआईाी एनके श्रीवास्तव ने कहा कि आगरा में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने साइबर प्रकोष्ठ खुलवाया था। इसमें बैंक फ्रॉड से जुड़े कई मुकदमे आए थे जिन्हें आईटी एक्ट के तहत दर्ज कर अच्छा काम किया गया था। उन्होंने बैंक अफसरों से अपील की कि मैनुअल हिन्दी में तैयार करवाएँ ताकि कई पुलिस अफसर अपनी हिचक दूर कर सकें। कई बार अंग्रेजी में होने के कारण अफसर इस तरह की विवेचना शुरू करने में हिचकिचाते हैं।ड्ढr ————————————————————————————————-ड्ढr क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों के लिए खतरे की घंटीड्ढr वरिष्ठ संवाददाता लखनऊड्ढr साइबर क्राइम में महारथ हासिल करने वाले धंधेबाजों ने क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों को ठगने के लिए नया तरीका क्षाद कर लिया है। ये लोग होटल में क्रेडिट कार्ड से बिल देते समय अथवा एजेन्ट से टिकट बुक कराते समय एक छोटे से यंत्र (स्किमर) में आपका क्रेडिट कार्ड स्वाइप कराकर डाटा चोरी कर लेते हैं। फिर इस डाटा को फर्ाी तरीके से तैयार किए दूसरे कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्राइप पर ट्रान्सर्फर कर लेते हैं। बैंक के अफसरों ने इस धोखाधड़ी से बचने का एक ही तरीका बताया-‘आप अपना क्रेडिट कार्ड किसी भी दशा में दूसरे के हाथों में न दें। होटल में क्रेडिट कार्ड से बिल अदा करना हो तो खुद ही काउन्टर तक जाएँ। ऐसा ही दुकान से खरीदारी करते समय करें।’ हालाँकि अफसरों ने यह माना कि भारत में अभी इस तरह के एक-दो ही किस्से आए हैं। क्यों कि यहाँ स्किमर फिलवक्त अमेरिका, थाईलैंड व मलेशिया में ग्रे मार्केट में बिक रहे हैं। पर, आने वाले चार-पाँच साल में भारत में भी स्किमर आसानी से जालसाजों को उपलब्ध हो जाएगा। विदेश में ऐसा करने वाले जालसाजों ने वेटर व होटल में ठहरने वालों के टिकट बुक कराने वाले एजेंटों को अपने गिरोह में शामिल कर रखा है।

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