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ढूंढ़ते रहेंगे नहीं मिलेगा कूड़ा प्वाइंट

राजधानी में ‘कूड़ा प्वांट’ ढूंढते रह जाओगे। प्रमुख सड़कों से लेकर मुहल्लों तक में दूर-दूर तक कूड़ा प्वांट का अता-पता नहीं है। जहां कुछ लोगों ने कूड़ा फेंक दिया वहीं बन गया कूड़ा प्वांट। कोई रोकने-टोकने वाला भी नहीं है। जहां मर्जी हो वहीं फेंक दो कूड़ा। नतीजतन सड़क के किनारे अघोषित ‘कूड़ा प्वांटों’ की संख्या हजारों में है। भले ही कूड़ा से उठने वाली दरुगध से लोगों का जीना दूभर हो जाए। निगम के कागजात में घोषित कूड़ा प्वांटों की कुल संख्या 823 है। इसमें नूतन राजधानी अंचल में 2बांकीपुर अंचल में 176, पटना सिटी अंचल में 22और कंकड़बाग अंचल में 120 कूड़ा प्वांट हैं।ड्ढr ड्ढr पिछले महीने नगर आयुक्त ने कूड़ा प्वांट पर बोर्ड लगाने, सफाई निरीक्षक व सफाई पर्यवेक्षक का नाम और फोन नं. लिखने का आदेश दिया था। यह आदेश कोई नया नहीं है। कूड़ा प्वांट पर बोर्ड लगाने के लिए आधा दर्जन से अधिक बार निगम प्रशासन द्वारा आदेश जारी किये गये हैं लेकिन कोई भी आदेश अब तक फाइल से बाहर नहीं निकला है। राजधानी की यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार द्वारा इसे महानगरीय दर्जा देने की तैयारी चल रही है पर हालत यह है कि कूड़ा फेंकने की भी जगह नहीं है।ड्ढr ड्ढr शहर की आबादी लगभग 20 लाख के आस-पास पहुंच चुकी है। नतीजतन आम लोगों द्वारा पूरे शहर का ही इस्तेमाल कूड़ा प्वांट के रूप में किया जाता है। कहीं भी किसी भी सड़क के किनारे मजबूरीवश लोग कूड़ा फेंक देते हैं। आम लोगों को जनसुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी पटना नगर निगम की है। निगम द्वारा हर महीने डेढ़ से दो करोड़ रुपये लोगों से कर के रूप में वसूले जाते हैं। इसके बावजूद आम लोगों की सुविधा के लिए व्यवस्था नहीं की जाती है। हाल ही में नौ वीआईपी सड॥कों पर कूड़ा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया। अब लाख टके का सवाल यह है कि कूड़ा प्वांट का बोर्ड ही नहीं लगा है तो शहरवासी कहां फेंके कूड़ा। पार्षद विनय कुमार पप्पू के मुताबिक सशक्त स्थायी समिति और निगम प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से शहर की ऐसी स्थिति है।ं

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