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भांग का अमेरिका में हो रहा है पेटेंट

महाशिवरात्रि और होली का रंग तभी जमता है जब भांग का भी संग हो। यकीनन भांग का ज्यादा इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। लेकिन त्यौहार पर भांग की ठंडाई या पकोड़ों का लोभ लोग छोड़ नहीं पाते। वजह शिवजी के इस पेय से लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। शिव के नाम पर भांग का सेवन सही है या गलत यह बहस का विषय है। लेकिन शिवजी के देशवासियों के हाथ से भांग फिसल रही है। भांग पर अमेरिका में धड़ाधड़ प्रोडक्ट पेटेंट हो रहे हैं। चूंकि आने वाला युग प्रोडक्ट पेटेंट का है इसलिए कोई बड़ी बात नहीं कि कल कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी भारत में भाग की खेती पर ही सवाल उठाए। या शिवरात्रि या होली पर भांग की ठंडाई के लिए इन्हीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भांग आधारित प्रोडक्ट खरीदने की बाध्यता हो जाए। इतिहास पर नजर डालें तो भारत में भांग का इस्तेमाल ईसा से 1000 साल पूर्व से चल रहा है और आयुव्रेद में भांग से कई मानसिक बीमारियों तथा गंभीर दर्द के उपचार की विधियां है। शिवजी हो या आयुव्रेद दोनों लिहाज से भांग पर हिन्दुस्तान का अधिकार बनता है लेकिन भांग पर पहला पेटेंट (यूएस-6630507) अमेरिका में हथिया लिया गया है। वहां चरस से बनी एंटी आक्सीडेंट और न्यूरोप्रोटेक्टर दवा पर हैल्थ एंड ह्यूमन सर्विस ने पेटेंट लिया है। किन्तु भारत सरकार बेखबर है। अलबत्ता टड्रिशनल नालेज लाइब्रेरी में भांग के उपयोग को कई भाषाओं में दर्ज किया है। लेकिन सरकार ने देरी कर दी। आयुव्रेद विशेषज्ञ डा. रामनिवास पाराशर के अनुसार आयुव्रेद में भांग के करीब 150 औषधीय इस्तेमाल हैं। इनमें एंग्जाइटी, लू से बचाव, बुखार में उपचार गंभीर दर्द से निजात, स्पीच थेरैपी, पेट की बीमारियों का उपचार आदि शामिल हैं। लंबे समय तक इसका नशा खतरनाक है। ऐसे लोग सिजोफ्रेनिया की चपेट में आ सकते हैं। ब्रिटेन में एक अध्ययन में पाया गया है कि भांग का नशा सड़क हादसों के लिए ज्यादा जिम्मेदार है। दूसर, भांग के लंबे समय तक सेवन से स्मरण शक्ित भी नष्ट हो जाती है।ड्ढr

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