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11 दिसंबर, 2019|5:55|IST

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महाकुंभ: आस्था की शाही डुबकी

महाकुंभ: आस्था की शाही डुबकी

हरिद्वार में इन दिनों महाकुंभ चल रहा है। जनवरी माह से शुरू हुआ कुंभ अप्रैल माह के अंत तक चलेगा। कुंभ में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए आ रहे हैं। कुंभ में सबके आकर्षण का केंद्र साधु-संन्यासियों का शाही स्नान होता है। इस शाही स्नान को देखने के लिए और कवर करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और मीडिया कर्मी कुंभ मेला पहुंचते हैं। हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले पर विशेष रिपोर्ट।


शाही स्नान के लिए शाही जुलूस
कुंभ के दौरान सबके आकर्षण का केंद्र विभिन्न अखाड़ों के शाही स्नान होते हैं। शाही स्नान के लिए प्रत्येक अखाड़े का क्रम और समय निश्चित होता है। इस दौरान आम लोगों को स्नान की मनाही कर दी जाती है। दो शाही स्नान हो चुके हैं। शाही स्नान के लिए विभिन्न अखाड़ों के संत सोने-चांदी की मढ़ी पालकियों, रथों, हाथी-घोड़ों पर सवार होकर अपने अखाड़ों के साधुओं के साथ निकलते हैं। अखाड़ों से जुड़े संत-संन्यासियों के अलावा अन्य व्यक्ति शाही स्नान नहीं कर सकता और उसका हिस्सा भी नहीं बन सकता। कुंभ में संन्यासियों, बैरागियों, उदासीनों और निर्मलों के 13 अखाड़ों के साधु-संत शाही स्नान कर सकते हैं। दौड़ लगाते साधुओं का गंगा में छलांग लगाना और पानी से निकल कर शरीर में भभूत लगाना लोगों में कौतुहल पैदा करता है।

शाही स्नान का है अपना एक इतिहास
शाही स्नान का भी अपना एक इतिहास है। मध्यकाल में मुस्लिम आक्रमणकारियों से मुकाबला करने के लिए संन्यासियों के मध्य से नागाओं की फौज तैयार की गई। इसे अखाड़ों के महामंडलेश्वरों ने वैचारिक-आध्यात्मिक आधार प्रदान किया। इनके पराक्रम को देखते हुए पृथ्वीराज चौहान के शासन में राष्ट्र-ध्वज और धर्म-ध्वज को अलग कर दिया गया। धर्म-ध्वज को संवेदनशील मान कर रक्षा के लिए अखाड़ों को सौंप दिया गया।

धर्म-ध्वजा की रक्षा करने के सम्मान में राजाओं ने अपनी सम्पदा एक दिन के लिए ही सही, संतों के हवाले कर दी। आम लोगों ने राजा के बाद पहली बार किसी को ऐसे वैभव के साथ देखा। इसी कारण इसे ‘शाही’ स्नान नाम दिया गया। स्वामी चिन्मयानंद कहते हैं कि शाही स्नान कुंभ पर साधु-संतों का नागरिक अभिनंदन था। राजा अपनी सारी सम्पदा देकर यह साबित करता था कि राज्य में संन्यासियों, बैरागियों का स्थान बहुत ऊंचा है। कुंभ परंपरा के विशेषज्ञ आचार्य डॉ. विष्णुदत्त के अनुसार शाही स्नान का उल्लेख उत्तर मुगलकाल से पूर्व नहीं मिलता। इसी तरह पेशवाई तथा छावनी शब्द भी इसी काल से प्राप्त होते हैं। नागा संन्यासी युद्धवीर थे, इसलिए इन्हें कुंभ पर्व पर स्नान के लिए शाही सम्मान तथा शाही सुरक्षा प्रदान की गई। बालाजी विश्वनाथ पेशवा से लेकर बाजीराव द्वितीय पेशवा तक हरिद्वार-प्रयाग में इन संन्यासियों को बराबर सम्मान मिलता रहा, अत: पेशवा सैनिकों के साथ चलने के कारण इन संन्यासियों के तीर्थ नगर प्रवेश को पेशवाई कहा जाने लगा।

शाही स्नान के क्रम को लेकर कई सदियों तक अखाड़ों के बीच संघर्ष भी हुए। करीब 200 साल पहले अंग्रेज सरकार ने सात संन्यासी अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम तय किया। अखाड़ों के बीच समझौते के बाद अब स्थितियां ज्यादा सहज हो गई हैं। पहले संन्यासी अखाड़े ही शाही स्नान करते थे। बाद में इसमें वैष्णव अखाड़े भी शामिल हो गए। शाही स्नान के लिए निर्मलों को सबसे अधिक संघर्ष करना पड़ा। पटियाला नरेश साहिब सिंह ने कुंभ में स्नान करते संन्यासियों पर हमला करके निर्मल अखाड़े के लिए स्थान बनाया था। शाही स्नान में सर्वप्रथम संन्यासी अखाड़े, फिर रामानंदी बैरागी वैष्णव अखाड़े, फिर दोनों उदासी अखाड़े और आखिर में निर्मल अखाड़ा स्नान करने लगे। संन्यासी अखाड़ों ने तीनों शाही स्नानों के लिए अपना क्रम स्वयं तैयार किया।

भूले तो ढूंढ़ते रह जाएंगे
हरिद्वार कुंभ स्नान के लिए आप बाहर से हरिद्वार आए हैं तो हरिद्वार के बारे में पूरी जानकारी रखें। गंगा तट तक पहुंचने के लिए काफी पैदल चलना पड़ेगा। हरकी पैड़ी से सटे गंगा घाटों पर स्नान केलिए 7-8 किमी पैदल चलना पड़ेगा। हाई-वे पर बनाए गए तमाम घुमावों से गुजर कर ही गंगा घाटों तक पहुंच सकेंगे। अगर आप रास्ता भूल जाएं तो पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

चप्पे-चप्पे पर है निगरानी
आतंकी हमलों की आशंका के चलते कुंभनगर में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता है। सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा डीआईजी से एएसपी स्तर के 15 अधिकारी और पैरामिलिट्री और राज्य पुलिसों के 14 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मियों पर है। कुंभ क्षेत्र में 132 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अकेले हरकी पैड़ी पर 55 सीसीटीवी स्थापित किए गए हैं।

मुश्किल में साथ देंगे नंबर
आप अगर किसी मुश्किल में पड़ जाते हैं तो आप पुलिस कंट्रोल रूम को 100 नम्बर के अलावा 104, 108 और 18001804135 टोल फ्री नंबर पर फोन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त 9411112780, 8954488031, 01334-266734, 01334-266734, 01334-224370 पर संपर्क किया जा सकता है।

एडवांस में कराएं बुकिंग
हरिद्वार में श्रद्धालुओं के ठहरने की खास व्यवस्थाएं की गई हैं। शहर के करीब एक हजार होटल-धर्मशालाओं और आश्रमों में रोजाना एक लाख लोग ठहर सकते हैं। इनमें धर्मशालाएं, आश्रम और कुंभनगर के शिविरों को भी शामिल कर लें तो करीब दो लाख और लोग ठहर सकते हैं।  मार्च-अप्रैल के शेष दो शाही और दो सामान्य स्नानों पर आशियाने में रुकने के लिए श्रद्धालुओं को ज्यादा किराया अदा करना पड़ सकता है। अभी श्रद्धालुओं को होटलों के लिए 20 से 40 हजार रुपए चुकाने पड़ रहे थे। दो व्यक्तियों के लिए सामान्य रूम का किराया 5 हजार रुपए है, लेकिन शर्त यह है कि कमरा कम से कम चार दिनों के लिए बुक कराना होगा। एसी रूम का किराया 8 हजार रुपए प्रतिदिन का है। इसमें पांच प्रतिशत लक्जरी टैक्स शामिल नहीं है। अप्रैल में सीजन को देखते हुए शाही स्नान से सात दिन पहले और बाद के रेट समान ही रहेंगे। होटलों-धर्मशालाओं के अलावा कुंभ में तीन टेंट कॉलोनी बनाई गई हैं। विदेशी मेहमानों के लिए छोटे-छोटे कॉटेज भी बनाए गए हैं। 

 

कैसे पहुंचें हरिद्वार
हरिद्वार रेल व बस सेवा से सीधे देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। देहरादून का जौलीग्रांट एयरपोर्ट हरिद्वार का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। दिल्ली से सीधे हवाई सेवाएं जौलीग्रांट के लिए उपलब्ध हैं। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से हरिद्वार   पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की दूरी करीब 20 किलोमीटर है।

बस सेवा: दिल्ली, चड़ीगढ़, मेरठ, लखनऊ, कानपुर, शिमला, लुधियाना, जम्मू, जयपुर जैसे स्थानों से सीधी बस सेवाएं हरिद्वार के लिए उपलब्ध हैं। दिल्ली व देहरादून से हर आधे घंटे पर बस सेवा का इंतजाम है।
ट्रेन सेवा: हरिद्वार के लिए सीधी रेल सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन शहर के मध्य भाग में ही स्थित है और यहां से कुंभ स्नान के लिए मुख्य स्थल हरकी पैड़ी की दूरी महज 3 किलोमीटर है। इनके अलावा कुछ स्पेशल ट्रेनें भी शुरू की गई हैं। इनमें  235 ए-अजमेर, 0454-लखनऊ, 0459-जम्मूतवी, 0455-अमृतसर, 6एसडी-दिल्ली, 2डीएनएस-दिल्ली, 2डीएम-दिल्ली, 4370-बरेली शामिल हैं।

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