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बन रहा गोदामों का नेटवर्क

भंडारण की समस्या से उबरने के लिए सरकार विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर गोदामों का नेटवर्क तैयार कर रही है। जिलों में हजारों टन की क्षमता से लेकर पंचायतों में सौ-सौ टन तक के गोदाम बनेंगे। इसकी जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), राज्य खाद्य निगम (एसएफसी), राज्य भंडार निगम और पैक्स उठायेंगे। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने भी सभी जिलों से नये स्थानों पर गोदामों की आवश्यकता को लेकर कार्ययोजना मांगी गयी है। गोदामों की संख्या बढ़ने पर बीपीएल, अन्त्योदय और अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थियों और बाढ़पीड़ितों को भी अनाज की अबाध आपूर्ति होगी।ड्ढr ड्ढr साथ ही किसानों को भी राहत मिलेगी। धान और गेहूं की रिकॉर्ड सरकारी खरीद की वजह से बिहार में बार-बार गोदामों का संकट पैदा हो रहा है। जगह के अभाव में किसानों को कई-कई दिनों तक सरकारी खरीद केन्द्रों पर भी रहना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार एफसीआई मोहनियां में 25 हजार टन क्षमता का गोदाम बना रहा है। कटिहार में भी 50 हजार टन क्षमता का गोदाम बनाने का प्रस्ताव एफसीआई की राज्य परामर्शदातृ समिति के पास विचाराधीन है। एफसीआई के पूरे राज्य में 48 जबकि एसएफसी के 35गोदाम हैं। अब एसएफसी निजी एजेंसियों के सहयोग से 127 स्थानों पर 500-500 टन क्षमता के नये गोदाम बनवायेगा। इसके लिए बड़ी संख्या में टेंडर मिले हैं। राज्य भंडार निगम फतुहा, समस्तीपुर, छपरा, मोतिहारी और मोहनियां में 40 हाार टन की क्षमता के पांच नये गोदाम बनायेगा। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जिलों के निर्धनतम इलाके में 5000 टन क्षमता के गोदामों के निर्माण की कार्ययोजना मांगी हैं।

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