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14 नबम्बर, 2019|6:11|IST

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नींद रात भर क्यों नहीं आती

पैंसठ फीसदी शहरवासियों की नींद अधूरी है। वे रात को सोने की कोशिश करते हैं, पर नींद देर से आती है। नींद आ भी गई तो बीच में टूट जाती है। सुबह मन बोझिल रहता है। दिन में आलस हावी रहना है। यदि आपको भी यह समस्या है तो देर न करें। डॉक्टर से मिलें। क्योंकि ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह तथ्य आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और न्यूरो स्लीप सेंटर में पहुँचने वाले मरीजों के अध्ययन से पता चले हैं। यहाँ नींद न आने के मरीजों की भीड़ बढ़ रही है।

एसएन के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केसी गुरनानी के मुताबिक हर आदमी जीवन में कभी न कभी नींद न आने की समस्या से जूझता है। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। पर यदि नींद बार-बार न आए तो समझिए बीमारियाँ आपकी दहलीज पर हैं। दिल्ली गेट स्थित न्यूरो स्लीप क्लीनिक के डॉ. नरेंद्र मल्होत्र के मुताबिक 65 फीसदी लोग नींद की समस्या से परेशान हैं। जबकि मात्र 40 फीसदी लोग ही इसका जिक्र करते हैं।

उनके मुताबिक दिसम्बर से अब तक क्लीनिक में 454 लोग पहुँचे। इनमें से साढ़े तीन सौ मरीजों में नींद न आने की समस्या थी। यहाँ निंद्रा अध्ययन से नींद में सांस की रुकावट का पता लगाया जाता है। स्लीप सेंटर में सोते समय खर्राटे, सांस व खून में ऑक्सीजन स्तर को दिमाग की क्रिया के साथ रिकॉर्ड की जाती है। नींद में ऑक्सीजन का स्तर पूरा रखने का काम सी पैप मशीन कर सकती है। यह सामान्य हवा को मामूली धक्के के रूप में सोते समय सांस में पहुंचाती है।

एसएन के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पीके महेश्वरी का कहना है कि पूरी नींद का पैमाना यही है कि सुबह ताजगी के साथ उठें तो समझों कि नींद पूरी हो गई। रात में अक्सर नींद टूटती है, वे गहरी नींद के फायदे से वंचित रह जाते हैं। उनका कहना है कि यूँ तो हर आदमी की अपनी जरूरत अलग होती है, पर सात से आठ घंटे की नींद को सभी जरूरी मानते हैं। नींद का मुख्य काम दिमाग को आराम देना है। इसकी कमी से दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर हाई हो जाते हैं। इससे दिमाग के न्यूरॉन्स को नुकसान पहुँचने की आशंका पैदा हो जाती है।

 दूसरी ओर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीआर रावत का कहना है कि सात-आठ घंटे की नींद आम आदमी के लिए जरूरी है। खासकर युवाओं के लिए। कम सोने से ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। हालाँकि उम्र बढ़ने के साथ नींद की जरूरत कम हो जाती है। नींद आपको रीचार्ज करती है। इससे शरीर के पुनर्निर्माण का काम पूरा हो जाता है। शरीर को आराम मिलने और मेटाबॉलिज्म के अच्छा होने के साथ-साथ पेट व दूसरे अंग और देखने व सुनन की इंद्रियां भी अपना काम बढ़िया करने लगी है। ठीक नींद वजन भी कम कर देती है।

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