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11 दिसंबर, 2019|5:54|IST

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अभी और कम होगा गंगा में पानी !

लगातार घटते जलस्तर से गंगा का अस्तित्व पहले से ही खतरे में था। अब जीवनदायिनी पर एक और संकट आ गया है। इस संकट को गम्भीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में गंगा भी सरस्वती की तरह इतिहास का हिस्सा हो जाएंगी। गंगा के अस्तित्व को गिरते भूजल स्तर ने खतरे में डाल दिया है। गंगा के मैदान में भूजल स्तर नहीं सुधरा तो गंगा को गंगा रिवर बेसिन प्राधिकरण भी नहीं बचा पाएगा। अभी तो उधार के पानी से माघ मेले में संगम का जलस्तर बढ़ाते हैं।

गंगा के क्षेत्र में भूजल संकट भी नदी में पानी कम होने से ही शुरू हुआ। पिछले साल बारिश के दिनों में गंगा का जलस्तर अधिकतम 78.5 मीटर तक ही पहुँचने से नदी के क्षेत्र में भूजल की स्थिति बिगड़ी। कम जलस्तर के चलते गंगा के कछार में पानी नहीं पहुँचा तो भूमिगत पानी रीचार्ज नहीं हुआ। ऐसा माना जाता है कि गंगा का जलस्तर 81.5 मीटर तक जाए और कछार में दो-तीन दिन तक पानी भरा रहे तो भूमिगत जल रीचार्ज हो जाता है। इसके लिए जरूरी है कि गंगा के मैदान में पर्याप्त बारिश हो। पिछले साल गंगा के मैदान में बारिश नहीं होने का प्रभाव अब दिखाई पड़ रहा है।

केंद्रीय भूजल विभाग के वैज्ञानिक डा. एच के पांडेय कहते हैं कि नदी का जलस्तर पहले से ही कम है। उससे भूजल रीचार्ज होता रहा तो ऊपर जलस्तर और घटेगा। नदी के जानकार व सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता उमेश शर्मा ने बताया कि यह खतरे की घंटी है। जिस तरह पानी कम हो रहा है उसे देख तो यही लगता है कि इस साल गंगा में न्यूनतम जलस्तर का रिकार्ड बन जाएगा।

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