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14 नबम्बर, 2019|6:21|IST

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भारतीय मुक्केबाजों ने छह स्वर्ण जीत रचा नया इतिहास

भारतीय मुक्केबाजों ने छह स्वर्ण जीत रचा नया इतिहास

ओलंपिक और विश्व कांस्य पदक विजेता विजेन्द्र सिंह की अगुवाई में भारतीय मुक्केबाजों ने अपने शक्तिशाली मुक्कों की धाक जमाते हुए पांचवीं राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी प्रतियोगिता में छह स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।

विजेन्द्र ने अपनी ओलंपिक और विश्व प्रतियोगिता की कामयाबी में एक और उपलब्धि जोड़ते हुए राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी का स्वर्ण भी अपने नाम कर लिया। विजेन्द्र ने प्रतियोगिता से पहले वादा किया था कि भारतीय मुक्केबाज इस प्रतियोगिता में सभी दस स्वर्ण पदक जीतेंगे। हालांकि भारत दस स्वर्ण तो नहीं जीत पाया लेकिन उसने छह स्वर्ण जीतकर राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी में अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी।

भारत के छह मुक्केबाज अपने अपने वर्गों के फाइनल में पहुंचे थे और इन सभी छह मुक्केबाजों ने स्वर्ण पदक जीतकर अपने मुक्कों की गूंज दुनिया में गूंजा दी। विजेन्द्र ने 75 किग्रा मिडिलवेट वर्ग में, दिनेश कुमार ने 81 किग्रा लाइट हैवीवेट वर्ग में, परमजीत समोटा ने 91 किग्रा सुपर हैवीवेट वर्ग में, जय भगवान ने 60 किग्रा लाइटवेट वर्ग में, सुरंजय सिंह ने 52 किग्रा के फ्लाईवेट वर्ग में और अमनदीप ने 49 किग्रा के लाइट फ्लाईवेट वर्ग में स्वर्ण जीते।

विजेन्द्र ने अपनी तूफानी फार्म बरकरार रखते हुए मिडिलवेट वर्ग के खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड के फ्रैंक बुगलियोनी को 13-3 के बड़े अंतर से धोकर रख दिया। विजेन्द्र ने पहले राउंड से ही अपने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को जो पीटना शुरू किया तो यह पिटाई आखिरी राउंड में मुकाबला खत्म होने के बाद ही थमी।

विजेन्द्र ने पहला राउंड 3-1 से जीता। दूसरे राउंड को उन्होंने 4-1 से अपने पक्ष में किया। तीसरे राउंड में विजेन्द्र के जबर्दस्त प्रहारों के आगे वुगलियोनी पनाह मांगते नजर आए। तीसरा राउंड विजेन्द्र ने 6-1 के बड़े अंतर से जीता। तीसरा राउंड जब समाप्त हुआ तो विजेन्द्र 13-3 के शानदार स्कोर के साथ विजेता बन चुके थे और अपने हाथ उठाकर प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

भारत के इस स्टार मुक्केबाज ने पिछले तीन वर्षों में कामयाबी के नए झंडे गाडे हैं। वर्ष 2008 में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद विजेन्द्र ने गत वर्ष विश्व चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक हासिल किया। इस कामयाबी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी में स्वर्ण जीतकर एक सोना जीतने का अपना सपना भी पूरा कर लिया।

भारतीय मुक्केबाजों की इस स्वर्णिम कामयाबी ने अक्टूबर में होने वाले 19वें राष्ट्रमंडल खेलों के लिए शानदार प्रदर्शन की उम्मीद भी जगा दी। भारतीय मुक्केबाजों में दिनेश कुमार को लाइट हैवीवेट वर्ग में और सुरंजय को फ्लाईवेट वर्ग में वाकओवर मिल गया तथा स्वर्ण उनकी झोली में आ गया।

समोटा, अमनदीप और जय भगवान ने अपने अपने प्रतिद्वंद्वियों को रिंग में तारे दिखा दिए। समोटा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 91 किग्रा से अधिक के सुपर हैवीवेट वर्ग में न्यूजीलैंड के जोसेफ पार्कर को 7-3 से धुनते हुए देश को प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण पदक दिला दिया। अमनदीप ने इस स्वर्णिम अभियान को जारी रखते हुए 49 किग्रा के लाइट फ्लाईवेट वर्ग में केन्या के पीटर मुंगई को 3-0 से धो दिया।

इसके बाद सुरंजय ने 52 किग्रा वर्ग के फ्लाईवेट वर्ग के खिताबी मुकाबले में मारीशस के ओलिवर लेविगी को नाकआउट कर दिया। लेविगी पहले राउंड के बाद रिंग से हट गए जिसके बाद सुरंजय को विजेता घोषित कर दिया गया। सुरंजय उस समय 1-0 से आगे थे।

समोटा ने 91 किग्रा से अधिक के सुपर हैवीवेट वर्ग में अपने किवी प्रतिद्वंद्वी को अपने जबर्दस्त मुक्कों से धोकर रख दिया। हालांकि पहले दो राउंड तक दोनों मुक्केबाजों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा लेकिन अंतिम राउंड में समोटा ने पार्कर को संभलने का मौका नहीं दिया।

भारतीय मुक्केबाज ने पहला राउंड 1-0 के अंतर से जीता। दूसरे राउंड में दोनों के बीच जोरदार मुकाबला चला और इस राउंड में दोनों मुक्केबाज 3-3 से बराबर रहे। तीसरे राउंड में प्रवेश करने तक समोटा 4-3 से आगे चल रहे थे लेकिन अंतिम राउंड में उन्होंने तीन अंक बटोरे जबकि उनका प्रतिद्वंद्वी एक भी अंक हासिल नहीं कर सका।

समोटा ने यह मुकाबला 7-3 से जीतकर तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में खुशी की लहर दौड़ा दी। भारत की इस खुशी को कुछ देर बाद ही अमनदीप ने दोगुना कर दिया। अमनदीप ने अपने केन्याई प्रतिद्वंद्वी से पहला राउंड 2-0 से जीत लिया। दूसरे राउंड में दोनों मुक्केबाजों के बीच जबर्दस्त मुकाबला हुआ और इस राउंड में कोई भी अंक हासिल नहीं कर सका। यह संघर्ष तीसरे और राउंड में भी बरकरार रहा और इस बार अमनदीप ने एक अंक लेते हुए मुकाबला 3-0 से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

जय भगवान ने 60 किग्रा के लाइट फ्लाईवेट वर्ग में बहामा के वेलेंशन नोल्स को 6-2 से पीट दिया। पहला राउंड 1-1 से बराबर रहा और दूसरे राउंड में भी 2-2 की बराबरी रही लेकिन तीसरे राउंड में जय भगवान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मुक्कों की बारिश की और चार अंक बटोरकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

दिनेश कुमार को 81 किग्रा के लाइट हैवीवेट वर्ग में स्काटलैंड के कैलम जानसन के चोटिल होने के कारण वाकओवर मिल गया और वह स्वर्ण पदक जीत गए। जानसन अपनी कोहनी की चोट के कारण मुकाबले में नहीं उतरे।

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