स्ट्रेचिंगः रीढ़ को बचाने के व्यायाम - स्ट्रेचिंगः रीढ़ को बचाने के व्यायाम DA Image
20 नबम्बर, 2019|11:49|IST

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स्ट्रेचिंगः रीढ़ को बचाने के व्यायाम

सारा दिन कुर्सी पर बैठे रहने से आपकी पीठ को जितना नुकसान होता है उतना और किसी कारण नहीं होता, लेकिन यह समस्या किसी भी डेस्क जॉब का हिस्सा है। इस समस्या से निपटने के लिए व्यायाम के चार साधारण उपाय बता रही हैं माया राव

पूरे दिन डेस्क पर ही बैठे रहने से आपकी गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यदि आप सही स्थिति में नहीं बैठते हैं तो सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस और पीठ से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। योग का निरंतर अभ्यास आपको आपके शरीर के प्रति सचेत करता है और आपका ध्यान रीढ़ की ओर भी जाता है। यहां दिए गए स्ट्रेचिंग के चार उपायों से आपकी मांसपेशियों की थकान दूर होती है और पूरे दिन आपको ठीक स्थिति में बैठना भी सिखाती हैं।

चेस्ट स्ट्रेच
क्यों जरूरी : यह मुद्रा सीने को खोलती है, गोल कंधों को कम और पीठ के मध्य हिस्से को सुगठित आकार में लाती है। साथ ही, यह काइफोसिस (रीढ़ के सबसे ऊपरी घुमाव) को भी कम करने में मदद करता है।
शुरुआत: कुर्सी के किनारे पर बैठें और अपने हाथ घुमाकर उसके बैकरेस्ट पर ऊपर रखें। थोड़ा आगे को झुकें। अपने कंधों को कानों के पास लाएं और दूर ले जाएं। यदि आपके हाथ कुर्सी के बैकरेस्ट तक न पहुंचें, तो उसके किनारे पकड़ें और अपना सीना आगे को ले जाएं, फिर कंधों को आराम दें और सीने के ऊपरी हिस्से को खुला छोड़ें। 10-15 बार सांस खीचें और खिंचाव हल्का करें।
सांस छोड़ते समय अपने हाथ धीरे से छोड़ें और उन्हें दोनों ओर लटका दें। कुछ देर बैठें और ध्यान दें कि आपकी पीठ को आराम महसूस होगा।
कितनी बार : एक बार यही व्यायाम फिर दोहराएं।

गर्दन का व्यायाम
क्यों जरूरी : यह स्ट्रेचिंग व्यायाम अकड़ी हुई और मोच खाई गर्दन के लिए विशेषत: अच्छा होता है। आपको महसूस होगा कि यह गर्दन को कितना स्ट्रेच कर सकता है, साथ ही यह सर्वाइकल क्षेत्र के वर्टिब्र (रीढ़ की हड्डी का हिस्सा) के बीच उचित दूरी भी ला देता है।
शुरुआत: कुर्सी पर बिना पीठ टिकाएं बैठें। वैसे इसे आप खड़े होकर भी कर सकते हैं। सिर को रीढ़ की सीध में रखें ताकि आप बिल्कुल सीधी अवस्था में खड़े हों। सांस खीचें, और छोड़ने पर सीधे कान को सीधे कंधे पर झुकाएं लेकिन कंधे मत उठाएं। चार-पांच बार सांस खीचें और छोड़ें और बाएं गाल में पड़ने वाला खिंचाव महसूस करें। अपनी गर्दन और रीढ़ को खींचें। धीमे-धीमे सिर को सही दिशा में लाएं और दूसरी ओर से क्रिया दोहराएं।
कितनी बार: दोनों ओर दो बार इसे करें।

चेयर ट्विस्ट
क्यों जरूरी : यदि आप देर तक बैठे रह कर काम करते हैं तो ट्विस्ट करना लाभदायक होता है। टि्वस्टंग से आपकी पीठ की वह सभी मांसपेशियां हिलती हैं (विशेषकर पीठ के मध्य की) जो देर तक बैठे रहने से जड़वत् हो जाती हैं। इससे सीने और कंधों का भी व्यायाम होता है।
शुरुआत : अपनी कुर्सी बैठें और शरीर को एक ओर घुमाएं। ध्यान रखें कि आप बिल्कुल सीधे बैठे हों। रीढ़ को सीधा करें और सांस खीचें। फिर, सांस छोड़ते हुए कुर्सी की पीठ की ओर मुड़ें और दोनों हाथों से बैकरेस्ट को पकड़ें। पीठ की मांसपेशियों को कुछ आराम दें और धीमे से कुछ दूर हटें और अपने सीने को बैकरेस्ट के समांतर लाएं। कंधों को धीमे से नीचे लाएं। सीने को उठाकर धीमे से गहरे सांस भरें। 10-15 बार इसी तरह सांस भरें। फिर पहली मुद्रा में लौटें और दूसरी ओर से यही क्रिया दोहराएं।
कितनी बार: दोनों ओर से एक बार

कंधे घुमाना
क्यों जरूरी: यदि एक ही स्थिति में देर तक बैठते हैं तो हिलना-डुलना आपकी पीठ के लिए बेहद जरूरी होता है। इस विशेष क्रिया से आपकी पीठ के ऊपरी हिस्से और कंधों को आराम मिलता है, जहां ट्रेपिजियस नस स्थित होती है और जिस पर पूरे दिन के दौरान सबसे अधिक असर पड़ता है।
शुरुआत: सीधे बैठें, दाएं कंधे को कांन के पास ले जाते हुए सांस खींचें। अपने कंधे को धीरे से घुमाते हुए और कान से दूर ले जाते हुए सांस छोड़ें। कंधा घुमाने की यह क्रिया तीन बार दाई और बाईं ओर दोहराएं।
इसके बाद, सांस खींचते हुए दोनों कंधों को कानों के पास ले जाएं। सांस छोड़ते समय दोनों को घुमाते हुए नीचे लाएं।
कितनी बार : यह क्रिया पांच बार दोहराएं।

 

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