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9 दिसंबर, 2019|11:56|IST

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..आजादी के दीवानों का तो ख्याल रखते

जंगे-ए-आजादी के सिपाहियों जिन सिपाहियों के सम्मान में पूरा देश नतमस्तक हो जाता है, यूपी उनका भी ख्याल नहीं रख पा रही। स्वतंत्र सेनानियों के अंतिम संस्कार की रकम भी वक्त पर नहीं भेजी जा रही। कई-कई साल हो गए हैं, रकम लखनऊ में अटकी पड़ी है। इधर-उधर से जोड़तोड़ कर काम चलाने वाले अफसर प्रशासन से अपना हिसाब मांग रहे हैं और प्रशासन बार-बार शासन से तकादा कर रहा है।


1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले मशहूर स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश मित्तल का निधन गाजियाबाद में 26 अक्टूबर को हुआ था। वह 11/86 सैक्टर-आर राजनगर में रहते थे और आजादी के आंदोलन के दौरान लंबे समय तक तिहाड़ और मुल्तान जेल में बंद रहे थे। आजादी के बाद से ऐसे सेनानियों को जीते जी पेंशन देने और और निधन के बाद सरकारी खर्च पर अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था है।
अफसरों के मुताबिक, शुरू में शासन ने हर एक सेनानी के अंतिम संस्कार के लिए दो हजार रुपये देता था, बाद में यह रकम बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई थी। जैसे ही कहीं से स्वतंत्रता सेनानी के निधन की सूचना प्रशासन के पास आती है तो सम्बंधित जिले के डीएम तुरंत तहसीलदार को मौके पर भेजते हैं। फौरी तौर पर अंतिम संस्कार में खर्च होने वाले पैसा तहसीलदार अपने स्तर से कर देते हैं। बाद में प्रशासन इस रकम का भुगतान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद से करा देता है।


मगर इस मामले में गाजियाबाद की कहानी ठीक नहीं है। जेपी मित्तल के निधन का पता होते ही तहसीलदार सदर ने मौके पर पहुंचकर पैसा दे दिया था, मगर यह रकम उनको अब तक लखनऊ से मिल सकी है। पिलखुवा के स्वतंत्र सेनानी इंद्रदत्त, मोदीनगर तहसील के गांव जलालपुर ढिढार के सेनानी रामनिवास और मोदीनगर के गांव ग्यासपुर के फ्रीडम फाइटर सगर सिंह के निधन के मामलों में भी ऐसा ही हुआ है। सम्बंधित तहसीलों के अफ सर प्रशासन से अपना पैसा मांग रहे हैं। स्वतंत्र सेनानी विश्वप्रकाश दीक्षित के मामले में भी ऐसा ही हुआ था, मगर प्रशासन ने उनके अंतिम संस्कार में दिया पैसा किसी तरह एडजस्ट कर लिया। बाकी के मामलों का भुगतान न होने पर डीएम आर रमेश कुमार ने इसे लेकर शासन को चिट्ठी भेजी है। कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी ओपी गुप्ता कहते हैं कि यह पैसा इस सत्र में आ पाएगा, इसकी संभावना कम ही दिखती है।

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