सरकारी व निजी बीमा कंपनियों में लंबित दावों में अंतर - सरकारी व निजी बीमा कंपनियों में लंबित दावों में अंतर DA Image
20 नबम्बर, 2019|12:13|IST

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सरकारी व निजी बीमा कंपनियों में लंबित दावों में अंतर

सरकारी व निजी बीमा कंपनियों में लंबित दावों में अंतर

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को माना कि सरकारी और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों में लंबित दावों की संख्या में अंतर है, लेकिन उन्होंने इस अंतर को कम करने के लिए समिति बनाए जाने से इंकार करते हुए कहा कि इन दावों के यथाशीघ्र निपटारे के लिए प्रयास करना अधिक महत्वपूर्ण है।

मुखर्जी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान माकपा की वृंदा कारत के पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि सरकारी और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों में लंबित दावों की संख्या में अंतर का कारण यह है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों ने कुछ साल पहले ही काम शुरू किया है। जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम [एलआईसी] की स्थापना 1956 में हुई थी।

मुखर्जी ने बताया कि बीमा क्षेत्र में दावे की लंबी जांच होती है और फिर उनके निपटारे में भी समय लगता है। मुखर्जी ने आईआरडीए के हवाले से बताया कि बीमा कंपनियां मृत्यु संबंधी दावों का निपटारा निजी पॉलिसियों तथा सामूहिक पॉलिसियों के तहत करती हैं। वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा ने बताया कि वर्ष 2008-09 में दावों के 6000 से अधिक मामले लंबित थे। इनमें से 5586 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

मीणा ने बताया कि बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [आईआरडीए] एक नियामक संस्था है जो नियमित रूप से बकाया दावों का निरीक्षण कर बीमा कंपनियों को दिशा निर्देश देती है। उन्होंने बताया कि आईआरडीए ने एक शिकायत प्रबंधन प्रणाली भी बनाई है। निर्दलीय राहुल बजाज के यह कहने पर वाम दलों के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई कि क्या लोगों को निजी क्षेत्र की कंपनियों से अधिक लाभ प्राप्त करने का हक नहीं है। गौरतलब है कि बजाज दो निजी बीमा कंपनियों के अध्यक्ष हैं।

मीणा ने कहा कि देश में 23 बीमा कंपनियां हैं। इनमें से भारतीय जीवन बीमा निगम [एलआईसी] सरकारी क्षेत्र की और अन्य 22 बीमा कंपनियां निजी क्षेत्र की हैं। उन्होंने कहा कि सभी बीमा कंपनियां अच्छी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन इसके साथ ही दावों का बकाया भी बढ़ा है। समय समय पर इसमें आईआरडीए ने हस्तक्षेप भी किया है।

मीणा ने प्रवीण राष्ट्रपाल के पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के बीच कोई विवाद नहीं है और दोनों ही अपना अपना काम अच्छी तरह कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियां बेहतर लाभांश अर्जित करना चाहती हैं और उन्हें बेहतर बाजार देना होगा।

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