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18 नबम्बर, 2019|5:23|IST

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अभिशापों और उनके असर को बताती है 'शापित'

अभिशापों और उनके असर को बताती है 'शापित'

'राज़' और '1920' जैसी फिल्मों में आत्माओं की पूरी न हो सकी इच्छाओं को पर्दे पर उतारने के बाद निर्देशक विक्रम भट्ट अपनी तीसरी डरावनी फिल्म 'शापित' पेश करने जा रहे हैं। शुक्रवार को प्रदर्शित हो रही यह फिल्म बताती है कि अभिशापों का असर किस तरह से पीढियों तक रहता है।

भट्ट और मनमोहन सिंह के सह-निर्माण में बनी फिल्म 'शापित' गायक उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण की पहली फिल्म है। फिल्म में नई अभिनेत्री श्वेता अग्रवाल और मॉडल से अभिनेता बने राहुल देव ने भी अभिनय किया है।

भट्ट ने बताया, ''भारतीय कहानियों और पौराणिक कथाओं में अभिशाप की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है, पर मुझे नहीं लगता कि इस विषय पर अब तक कोई फिल्म बनी है। इसलिए मुझे लगता है कि अभिशाप और व्यक्ति की जिंदगी पर इसके असर पर फिल्म बनाना बहुत रोचक था।''

उन्होंने कहा, ''मैंने इसके लिए काफी खोज की थी और एक बहुत ख़ास तथ्य निकलकर आया। इससे पता चलता है कि एक अभिशाप किस तरह से काम करता है। जिस व्यक्ति को अभिशाप दिया जाता है और जो व्यक्ति अभिशाप देता है उन दोनों के न रहने पर भी शापित व्यक्ति के परिवार की पीढियों पर इसका असर रहता है।''

फिल्म 'शापित' अमन और काया के इर्द-गिर्द घूमती है। अमन काया के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है लेकिन काया के परिवार पर एक अभिशाप होता है जिसके चलते दोनों पर विवाह के बाद विपत्तियां आने लगती हैं। आदित्य ने फिल्म में चार गीत भी गाएं है।

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