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लिट्टे ने लगाई संघर्षविराम की गुहार

श्रीलंका कीसेना के साथ लड़ाई में निरंतर पराजय झेल रहे लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने संघर्षविराम और वार्ता की गुहार लगाई है लेकिन उसने आत्मसमर्पण से साफ इंकार किया है। लिट्टे ने एक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि श्रीलंका में तमिल समस्या का जल्द ही राजनीतिक समाधान ढूंढ़ने की आवश्यकता है। लिट्टे समर्थक वेबसाइट ‘तमिलनेट डॉट कॉम’ के मुताबिक तमिल व्रिदोहियों के राजनीतिक प्रमुख बी. नदेसन ने इस संबंध में रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुयल बरासो, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून, नार्वे के प्रधानमंत्री जेंस स्टोल्टेनबर्ग और जापान के प्रधानमंत्री टारो आसो को एक पत्र भेजा। इस पत्र में नदेसन ने कहा है कि विवाद के राजनीतिक हल के लिए लिट्टे संघर्षविराम और इसके बाद शांति वार्ता का इच्छुक है। उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘‘दुनिया को इस बात पर विचार करना चाहिए कि लिट्टे की ओर से आत्मसमर्पण करना विवाद के हल में मददगार नहीं साबित होगा। लिट्टे ने पहले भी कई शांति प्रयासों में हिस्सा लिया है। उस समय किसी ने हमें आत्मसमर्पण करने के लिए नहीं कहा।’’ गौरतलब है कि तमिल विद्रोहियों की ओर से संघर्षविराम से जुड़ी यह अपील उस समय की गई है जब मुल्लईतिवु में सेना ने उनकी चौतरफा घेराबंदी कर दी है।

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