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11 दिसंबर, 2019|5:54|IST

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हिन्दी में पत्र न लिखने पर लगी फटकार

हिन्दी में पत्र न लिखना नगर निगम के अफसरों को भारी पड़ गया। इस गुस्ताखी के लिए अफसरों पर स्थानीय निकाय के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव की डांट पड़ गई। शर्मिदा अफसर बंगले झांक रहे हैं। भूल सुधार के लिए हिन्दी में पत्र लिखने की कवायद शुरू कर दी। अफसरों की इस गलती की वजह से शहर की सफाई मुहिम को झटका लगा है। जो आदेश अब तक हो जाते। उसमें अब कुछ और समय लगेगा।

माजरा यह है कि निर्धारित स्थल से हटकर कूड़ा फेंकने वालों की जुर्माना राशि पांच सौ रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये करने का प्रस्ताव पिछले वर्ष नगर निगम के सदन में पास हुआ था। ताकि शहर को साफ सुथरा बनाया जा सके।

निगम की इस मुहिम को पार्षदों का जबरदस्त समर्थन मिला। विधिवत मंजूरी के लिए निगम प्रशासन ने प्रस्ताव हरियाण सरकार को भेज दिया। नगर निगम अधिनियम में संशोधन करवाने के लिए अफसरों ने नियम का प्रारूप अंग्रेजी में लिख भेजा। नियमानुसार संशोधन के लिए अंग्रेजी के साथ हिन्दी में प्रारूप की कापी तैयार करनी होती है।

बहरहाल, अंग्रेजी के साथ हिन्दी का प्रारूप न होने पर स्थानीय निकाय के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। अफसरों को फटकार लगाते हुए अंग्रेजी की प्रति वापस भेज दी। गलती सुधारने के लिए सचिव ने अफसरों को हिन्दी प्रारूप के साथ प्रस्ताव दोबारा भेजने के आदेश दिए हैं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू करने की बात कही है।

गौरतलब है खुले में कूड़ा फेंक कर शहर को गंदा करने वालों के खिलाफ निगम अफसरों ने सख्त कदम उठाने की वकालत की। ऐसे करने वालों के खिलाफ जुर्माने की 500 रुपये की राशि को कम बताया। इसे पांच हजार रुपये करने का प्रस्ताव निगम सदन में लाया गया। विधिवत मंजूरी मिलते ही इसे लागू किया जाएगा।

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