हजारों ख्वाहिशें ऐसी.. - हजारों ख्वाहिशें ऐसी.. DA Image
13 नबम्बर, 2019|10:42|IST

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हजारों ख्वाहिशें ऐसी..

पढ़-लिखकर में तैयार हो गया हूं, लेकिन हाथ पर हाथ धरे कब तक बैठा रहूंगा। काम तो कुछ करना ही है, सोचता हूं डॉन बन जाऊं। डॉन बनने के लिए कोई परीक्षा तो पास करनी नही होती है, सिर्फ आतंक फैलाना है। बस सुपारी लेकर कमाई करना। यह सब बड़े स्तर पर करना है, ताकि आठ-दस वर्षो में लोग मुझे डॉन मानने लगें। यह निर्णय किसी दबाव में नही है, मेरी स्वेच्छा से है।
जितने भी प्रतिष्ठित डॉन हैं, उनकी जीवन शैली देखकर ईर्ष्या होने लगी है। विदेश में बैठकर देश में अपने कारनामों को अंजाम देते हैं। मैं किसी डॉन विशेष का नाम नहीं लूंगा, क्योंकि मेरे आदर्श तो सभी डॉन हैं। डॉन बनने की प्रेरणा मुझे इसलिए भी मिली है कि उनका होता कुछ नहीं और बड़े-बड़े लोगों के वरदहस्त से आराम का जीवन जीते हैं। विदेशी सरकार पूरा संरक्षण देती है और यदि गिरफ्तारी की नौबत आ भी जाए तो शर्त लगा दी जाती है। आरोप भी सिद्ध हो जाएं तो भी जान पर जोखिम नहीं के बराबर है। बस मजे ही मजे हैं डॉन बनने में।
मुंबई मायानगरी के अनेक स्टार भी इनसे ताल से ताल मिलाते देखे गए हैं। मैं बन गया तो अपने आप चार से ज्यादा चांद लग जाएं। यदि मैं सार्वजनिक घोषणा के बाद डॉन बन जाता हूं, तो ऐतराज की बात क्या है? बस यह समझ नहीं पा रहा कि डॉन बनूं कैसे। बाल-बच्चेदार आदमी हूं। समाज में थोड़ी बहुत प्रतिष्ठा भी है। लोग मुझे सज्जन इंसान के रूप में पहचानते हैं, लेकिन इस सज्जनता से तो एक दिन पल्ला झाड़ना ही होगा, त्याग करना होगा, क्योंकि मुझे डॉन जो बनना है। अब गालिब का क्या करूं, जो कह गए हैं :  हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले। बहुत निकले मेरे अरमां मगर फिर भी वो कम निकले।

 

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