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16 दिसंबर, 2019|4:17|IST

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ये शरीर कुछ कहता है

आपका शरीर भी कुछ कहता है। उसकी भी अपनी एक भाषा होती है। उसका अपना एक व्याकरण होता है। उसकी लय ताल होती है। हमारी कामयाबी में उसकी अपनी अहमियत होती है। उसे समझे बगैर हम कभी मुकम्मल शख्सियत नहीं हो सकते। जेम्स बोर्ग ने गजब की किताब लिखी है ‘बॉडी लैंग्वेज।’ उनका मानना है कि बॉडी लैंग्वेज का हमारी जिंदगी पर जबर्दस्त असर होता है। हम खुद को दूसरों के सामने कैसे रखते हैं, उसका बहुत फर्क पड़ता है। हम चलते, बैठते और बोलते हैं। हर वक्त हमारा शरीर कुछ बोल रहा होता है। उसी का असर सामने वाले पर होता है। आप आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। या आप नर्वस हैं।
दोनों का असर आपके शरीर पर दिखने लगता है। उसे कायदे से समझने वाले लोग तो सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज का पूरा फायदा उठाते हैं। जेम्स राजनेताओं का जिक्र करते हैं। वह उनकी बॉडी लैग्वेज को गंभीरता से लेते हैं। चूंकि नेता को एक बड़ी भीड़ के सामने अपनी बात कहनी पड़ती है। इसलिए उनकी बॉडी लैंग्वेज बेहद मायने रखती है। उसीकी वजह से जनता किसीको विजेता मान लेती है और किसी को हारा हुआ करार दे देती है। वह शरीर की भाषा लोगों में भरोसा दिलाने का सबसे बड़ा साधन है।
 आमतौर पर हमारे भीतर जो चल रहा होता है, वही बाहर आता है। अब कोई बहुत बड़ा कलाकार हो, तो अलग बात है। हम जब भीतरी भरोसे से भरे होते हैं, तो वह बाहर भी छलकता रहता है। तो जरूरत अपने भीतर को मजबूत करने की है, लेकिन बाहर को भी आकर्षक बनाने की जरूरत होती है। उसीसे आपके आधे काम सध जाते हैं। आपके भीतर की शख्सियत का तो असर पड़ता ही है, लेकिन सबसे पहले तो आपके बाहर की शख्सियत असर करती है।

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