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10 दिसंबर, 2019|12:22|IST

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लोकायुक्त कर सकते हैं जांच

दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि लोकायुक्त न सिर्फ विधायक एवं अन्य जनसेवकों के खिलाफ आपराधिक मामले की समानांतर जांच कर सकते हैं बल्कि इनके सार्वजनिक  आचरण के  लिए कोड ऑफ कंडक्ट भी बना सकते हैं।

न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने एक आला अधिकारी की जमकर पिटाई करने के कथित आरोपी विधायक सतप्रकाश राणा की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही। बिजवासन से विधायक राणा ने लोकायुक्त द्वारा इस मामले पर स्वत : संज्ञान लेकर जांच के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने राणा की दूसरी बार अपील ठुकराते हुए कहा कि जनसेवकों के लिए सार्वजनिक आचारण संबंधी नियमावलि बनाना लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है। जनसेवकों से बेहतरीन आचरण की स्वाभाविक अपेक्षा के मद्देनजर लोकायुक्त किसी विधायक द्वारा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के दफ्तर में घुसकर मारपीट करने पर स्वत:संज्ञान भी ले सकते हैं।

गौरतलब है कि राणा पर गत वर्ष अक्टूबर में आर. के. पुरम स्थित जलबोर्ड के कार्यालय में सुप्रिंटेंडेंट इंजीनियर रमेश ठाकुर की पिटाई करने और शिकायत करने पर जान से मारने के धमकी देने का आरोप है। इंजीनियर की शिकायत पर पुलिस घटना की जांच कर रही है जबकि इससे जुड़ी मीडिया रिपोर्टो पर स्वत:लेकर लोकायुक्त ने भी जनप्रतितिनिधियों के लिए सार्वजनिक आचरण संहिता बनाकर समानांतर जांच के आदेश दे दिए।

अदालत ने राणा की याचिका खारिज कर लोकायुक्त के समक्ष विचाराधीन मामले कासे चलाने की अनुमति दे दी। अदालत ने कहा कि लोकायुक्त जनसेवकों के पारदर्शी आचरण को सुनिश्चित कराने वाली संस्था है जिसे इसके लिए लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त कानून के तहत पर्याप्त अधिकार है।

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