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13 नबम्बर, 2019|1:19|IST

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आयोग ने भी मानी सुविधाओं की कमी

मंदबुद्धि लोगों के लिए दिल्ली सरकार द्वारा संचालित आशा किरण होम में बदइंतजामों की सच्चाई को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने भी स्वीकार करते हुए इसमें व्यापक सुधार की गुंजाइश जताई है। आशा किरण होम में हाल ही में मंदबुद्धि लोगों की मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर एनसीपीसीआर की टीम ने इसका दौरा कर इसमें मूलभूत सुविधाओं के अभाव का खुलासा किया। आयोग की अध्यक्ष शांता सिंहा के नेतृत्व वाले दल की ओर से अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में इन घटनाओं के लिए मंदबुद्धि लोगों की देखभाल में भारी कमी, अव्यवस्था और कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।

रिपोर्ट के मुताबिक 350 लोगों की क्षमता वाले आशा किरण में 728 लोग रहने को मजबूर हैं। यह तथ्य अव्यवस्था की सच्चई उजागर करने के लिए पर्याप्त है। आयोग ने सरकार द्वारा द्वारका में निर्माणाधीन नए होम का काम शीघ्रतिशीघ्र पूरा कर अतिरिक्त लोगों को तत्काल स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। इसके अलावा स्टाफ की भारी कमी को भी कुप्रबंधन का प्रमुख कारण बताया गया है। इसी कारण से मूलभूत सुविधाएं जैसे साफ सफाई, चिकित्सा, भोजन और बिजली पानी की दुर्दशा हो गई है।

आयोग ने आशाकिरण होम के संचालन से जुड़े दस्तावेजों का कोई रिकार्ड न रखने पर घोर आश्चर्य जताते हुए इसे लचर प्रशासन का सबूत बताया है। नियमानुसार इसमें 350 लोगों के लिए 68 कर्मचारियों का स्टाफ होना चाहिए जबकि 728 मंदबुद्धि लोगों की देखभाल के लिए लगभग आधी पोस्ट खाली पड़ी हैं। रिपोर्ट में महिलाओं के  वार्ड में पुरुष वार्डों की तुलना में व्यवस्था लचर पाई गई।

अदालत ने रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है जिस पर सोमवार को सुनवाई होगी। गौरतलब है कि पिछले साल होम में 35 लोगों की मौत के कारण यह मामला प्रकाश में आया। जिसमें अकेले दिसंबर में ही 12 लोगों की मौज हुई। इसमें मंदबुद्धि नवजात बच्चों से लेकर वयस्कों की देखभाल और रहने अलग अलग व्यवस्था है।

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