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9 दिसंबर, 2019|9:26|IST

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ममता जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद

मैं पटना से दिल्ली का आरक्षण टिकट लेने के बाद काफी खुश व रोमांचित था। वह इसलिए नहीं कि दिल्ली जा रहे हैं। दरअसल बात यह थी कि मुझे सम्पूर्ण क्रांति का टिकट मिल चुका था। इस रेलगाड़ी के बारे में टिकट काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने खुद तारीफ की। यह रेलगाड़ी साफ-सुथरी और समय पर पहुंचाती है। सीट के नीचे देखने से अहसास हुआ कि इसमें झाड़ नहीं लगी है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप शौचालय से अनभिज्ञ हैं तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं। कोच की जिस सीट पर बैठे हो वहीं शौचालय की पहचान बनी रहती है, क्योंकि खुशबूदार शौचालय जो है। खुशबू से पूरा सफर गमगमाता रहता है। इसके अलावा और भी खूबियां हैं- जैसे खिड़की खुली ही रहेगी, क्योंकि प्राकृतिक हवा सेहत के लिए जरूरी है। भीड़-भाड़ देखकर जनरल कोच के अंदर जाने की हिम्मत ही नहीं हुई। इन ट्रेनों में इतना झेलने के बाद मैंने टिकट काउंटर पर बैठे व्यक्ति से पूछा कि दिल्ली जाने के लिए कोई साफ-सुथरी व अच्छी रेलगाड़ी का टिकट मिलेगा। टिकट क्लर्क ने कहा कि यह सबसे अच्छी ट्रेन है और टिकट हाथ में थमा दिया। टिकट पर सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस नाम लिखा था। पहली बार साफ-सुथरी रेलगाड़ी पर चढ़ने का मौका मिला। जब कोच के अंदर प्रवेश किया, सीट ढूंढ़ने के बाद तुरंत बाथरूम की ओर भागा। यहां भी वही खुशबूदार शौलाचय मिला। मैं धन्यवाद ममता जी कहकर बर्थ पर लेट गया।
शैलेन्द्र कुमार, नेहरू विहार, नई दिल्ली

उपहार या अपमान दिवस
यूं तो सरकार ने 100वें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला आरक्षण बिल संसद में पास करवाने का जो प्रयास किया, वे महिलाओं के लिए किसी उपहार से कम नहीं था, लेकिन कुछ चंद सांसदों के असंसदीय विरोध ने इसे उपहार की जगह अपमान दिवस बना दिया। जो बहुत ही शर्मनाक घटना है। एक ओर तो हमारे सांसद जहां अपने फायदों के लिए अपने घरों की बहू, बेटियों ओर पत्नियों को राजनीति का हिसा बना लेते हैं तो वहीं वह आम महिलाओं को इस क्षेत्र से जुड़ने से रोक रहे हैं। शायद इसी का नतीजा है कि 15वीं लोकसभा में केवल 59 महिलाएं ही संसद तक पहुंच पाई हैं। वैसे कोई भी राजनीतिक नेता सीधे तौर पर महिला बिल का विरोध नहीं करता लेकिन अल्पसंख्यक और दलित महिलाओं के नाम पर खूब राजनीति की जा रही है।
मनोज कुमार रायकवार, गोकलपुरी उत्तरपूर्वी- दिल्ली

33 फीसदी का सुख
महिला दिवस के मौके पर एक तरफ जहां राज्यसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव सदन में रखा गया, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार द्वारा कामगारों की न्यूनतम मजदूरी में 33 प्रतिशत वृद्धि एक साथ दोहरी खुशी लेकर आए।  दिन दूनी रात चौगुनी महंगाई के दौर में यह खबर उन तमाम लोगों को थोड़ी राहत तो अवश्य ही देगी जो दिल्ली में ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत कार्यरत हैं, जहां उनसे अपेक्षाकृत कम वेतन में तथा सुविधाओं के अभाव में हाड़तोड़ काम लिया जाता है। पिछले दिनों मजदूर संघ इंटक द्वारा प्रधानमंत्री से न्यूनतम आय सीमा 1000 रुपए करने की गुजारिश भी की गई जिस पर प्रधानमंत्री ने यह बात कैबिनेट के समक्ष रखने का भरोसा भी दिलाया। इसी बीच दिल्ली सरकार की न्यूनतम मजदूरी 33 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला कुछ फौरी राहत तो देगा ही, साथ ही साथ बढ़ती महंगाई की मार को सहने में सक्षम भी करेगा।
दीपक बर्थवाल, सिक्किम मनीपाल यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

स्वावलंबन का पाठ पढ़ाएं
देश में शिक्षित युवाओं की विशाल फौज है। ऐसे में सबके लिये नौकरियां मुहैया करना बेहद मुश्किल है। इस वजह से बेरोजगारी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही  है। देश में बढ़ती बेरोजगारी पर अगर अंकुश लगाना है तो युवाओं में स्वावलंबन को बढ़ावा दिया जाये। इसके लिए छात्रों को स्कूली दिनों से ही वोकेशनल ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को इस ओर प्राथमिकता से प्रयास करना चाहिये।  
सोहल सिंह, देहरादून

महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण बिल अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है, पर केवल बिल पास करने मात्र से ही इस पुरुष-प्रधान समाज में क्या महिलाएं सुरक्षित हो पाएंगी? मेरा सरकार से अनुरोध है कि केवल बिल पास कराकर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री न समझ लें, बल्कि सच्चे अर्थो में घर से लेकर बाहर तक हर स्थान पर महिलाओं को सम्मान मिले इसके लिए प्रयत्न करें, तभी इस बिल की सार्थकता है।
नीरा सिंघल, दिल्ली

धार्मिक प्रयोगशालाएं
प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके में कृपालु जी के आश्रम में भंडारे के दौरान हुआ दुखद हादसा धर्म और राजनीति की आड़ में केवल अपनी गेम चमकाने का प्रयोग है और उसके लिए हाजिर है गरीबों की झुग्गियों की प्रयोगशाला। जहां देखो धनाढय़ों को अपने ग्रह की शांति के लिए गरीबी ही नजर आती है। जन्मदिन, पार्टी, जश्न और उत्सवों में बचा माल खपाने के लिए मजदूर ही नजर आते हैं। किसी भी भले मानुष में इतना साहस नहीं कि पॉश इलाकों में जाकर अपने-अपने ग्रहों को शांत करें।
राजेन्द्र कुमार सिंह, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

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