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नौसेना में स्वदेशी पोत आने में लगेंगे पांच साल

ोच्चि में बन रहे पहले स्वदेशी विमानवाही पोत को सभी परीक्षणों के बाद 2014 में नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। करीब 40 हाार टन विस्थापन क्षमता का यह विशाल पोत रूस से खरीदे गए विमानवाही पोत एडमिरल गोर्शकोव से मात्र चार हाार टन कम वजन का है लेकिन कीमत के लिहाज से गोर्शकोव के मुकाबले तीन गुना सस्ता होगा। इस समफलता के साथ ही भारत अमेरिका,रूस और फ्रांस के बाद चौथा एसा देश होगा जो इस क्षमता के विमानवाही पोत बनाने में सक्षम है। यहां तक कि ब्रिटेन भी अभी तक 40 हाार टन वजनी विमानवाही पोत नहीं बना सका है जबकि भारतीय नौसेना के दोनों विमानवाही पोत विक्रांत और विराट ब्रिटेन निर्मित हैं। मौजूदा पोत विराट की विस्थापन क्षमता 28 हाार टन है। रूसी पोत बेशक 44 हाार टन का है लेकिन मूल रूप में हेलीकॉप्टरवाही पोत है जिसे भारत अपनी जरूरत के मुताबिक विमानवाही पोत में रूपांतरित कर रहा है। चीन कई दशकों से विमानवाही पोत बनाने की कोशिश में है लेकिन उसे अभी तक कोई सफलता नहीं मिली। उल्लेखनीय बात यह है कि इस पोत की 70 फीसदी से अधिक डिााइन नौसेना डिााइन महानिदेशालय ने बनाई है। इटली और रूस से भी मदद ली जा रही है।

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  • Web Title: नौसेना में स्वदेशी पोत आने में लगेंगे पांच साल