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15 नबम्बर, 2019|12:07|IST

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अगले माह गाड़ी ले रहे हैं तो हो जाएं सावधान

प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से देश के तेरह प्रमुख शहरों में बीएस 4 मानक 1 अप्रैल-2010 से लागू होने जा रहा है। पर्यावरण को सुरक्षित बनाने की इस कवायद में एक बार फिर से देश की जनता को बढ़ी ईंधन कीमतों और महंगी गाड़ियों से रूबरू होना पड़ेगा। पहले से महंगाई से दुखी जनता के लिए यूरो फोर मानक राहत से कहीं अधिक मुसीबत बनकर सामने आने वाला है। हालांकि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वाहन कंपनियां फूंक-फूंक पर अपनी नई गाड़ियों की कीमत पर फैसले ले रही हैं। फिर भी यह तय है कि आने वाले कुछ महीनों में बीएस 4 मानकों को अपनाने के लिए वाहन कंपनियां जो खर्चा कर रही हैं उसकी भरपाई ग्राहकों से करेंगी।

गाड़ियों का बढ़ सकता है माइलेज
गाड़ी में जितना प्रदूषण कम होगा जाहिर सी बात है कि उससे माईलेज बढ़ेगा। मौजूदा समय में लांच हो रही बीएस फोर नाम वाली गाड़िया जिनकी क्षमता एक हजार से 15 सौ सीसी के बीच में है वे 15 से 18 तक माइलेज देने में सफल हो रही हैं। हाल ही में लांच फोर्ड की फिगो का डीजल वजर्न 20 तक माईलेज देने में सफल हो रहा है। मारुति की अधिकतर गाड़ियां जिसमें ईको, ए स्टार आदि शामिल हैं आसानी से बेहतर माईलेज देने में सफल हो रही हैं।

पुरानी कारों को खतरा नहीं
अगर आपकी गाड़ी पुरानी है और वह इस नार्म्स को फॉलो नहीं करती तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि इन शहरों में आप वह गाड़ी ही नहीं चला पाएंगे। जिसके पास जो गाड़ी है उसमें कोई समस्या नहीं आएगी और न ही आपसे कोई यह कहने आएगा कि आप इस नार्म्स को फॉलो करने के लिए गाड़ी के इंजन को मोडीफाई करवा लीजिए। कुल मिलाकर बीएस 4 की यह एक्सरसाइज सिर्फ वाहन निर्माता कंपनियों और तेल कंपनियों की है। तेल कंपनियों को बीएस 4 के अनुकूल तेल देने के लिए अपनी रिफाइनरी को मोडीफाई करना पड़ रहा है तो वाहन निर्माता कंपनियां इस नॉम्स से मेल करने के लिए अपने इंजन को मोडीफाई कर रहे हैं।

सिर्फ गोवा को मिलेगा बीएस 3 का तेल
1 अप्रैल से लागू हो रहे बीएस फोर के लिए भले ही तेरह शहर पूरी तरह से तैयार हों पर बाकी के शहर जो बीएस 2 से 3 में प्रवेश कर रहे हैं अभी तेल कंपनियां उनको किसी भी कीमत पर इसके अनुकूल तेल देने को तैयार नहीं हैं। यूरो 3 वाला तेल देने के लिए तेल कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय को प्रस्ताव दिया कि वे सिर्फ गोवा में यूरो 3 तेल देंगे और इसके बाद वे चरणबद्ध तरीके से साल के अंत तक पूरे देश को यूरो तीन तेल देना शुरू कर देंगे।

विशेषज्ञ की राय
मारुति के मैनेजिंग एग्जीक्यूटिव ऑफीसर (इंजीनियरिंग) आईवी राव ने बताया कि बीएस फोर नॉर्म्स पर लाने के लिए हर वाहन की अपनी अलग रिक्वायरमेंट होती है। हमने अपनी गाड़ियों के इंजन को इस मानक से मेल कराने के लिए कई तरह के बदलाव किए हैं। मारुति 800 को छोड़कर सभी गाड़ियां इस मानक को फॉलो कर रही हैं। यही वजह है कि मारुति-800 उन 13 शहरों में नहीं बिकेगी जहां पर बीएस 4 मानक 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं।

सियाम का मत
सियाम के डायरेक्टर जनरल दिलीप चिनॉय कहते हैं कि जहां तक रही अप्रैल से लागू होने जा रहे यूएस मानकों की तो अभी भी हम यूएस और यूरोपियन मानकों से 4 से 6 साल पीछे हैं। यूरोपियन कार मेकर जब कार में ऐसा कोई ट्रीटमेंट उपकरण लगाते हैं तो वे वह चार्ज अपने ग्राहकों से वसूल करते हैं। जबकि भारत में इसका उल्टा है हम मानकों को फॉलो करना चाहते हैं पर यह बर्दाश्त नहीं करते कि गाड़ी की कीमत बढ़े। शायद यही कारण है कि हम अभी भी यूरोपियन मानकों से काफी दूर हैं। इस पहल से भारत की पर्यावरण के प्रति सजगता दिख रही है।

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