38 साल की नौकरी में पहला प्रोमोशन - 38 साल की नौकरी में पहला प्रोमोशन DA Image
11 दिसंबर, 2019|8:51|IST

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38 साल की नौकरी में पहला प्रोमोशन

 38 साल की सरकारी नौकरी में जीवन का पहला प्रोमोशन। विश्वास नहीं हो रहा पर है सच। वह भी एक नहीं तीन-तीन प्रोमोशन एक साथ। डाक्टरों के संघर्ष और राज्य सरकार की दो वर्षो की मेहनत के बाद वर्ष 1972 से लेकर 1979 के  दौरान नियुक्ति 325 डाक्टरों को पहला प्रोमोशन मिल रहा है। इस प्रोमोशन को डायेनेमिक एससीपी का नाम दिया गया है। अगले दो से तीन महीने में वर्ष 2002 तक नियुक्त प्रदेश के 2500 और डाक्टरों का प्रोमोशन होना तय है। स्वास्थ्य विभाग और बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ की संयुक्त पहल के बाद इस व्यवस्था के तहत सामान्यतया 40 से 45 हजार वेतन पाने वाले डाक्टरों को अब 60 से 65 हजार रुपए मिलेंगे। मेडिकल ऑफिसर (एमओ) से वे सीधे चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) की श्रेणी में आ जाएंगे।

डाक्टरों के बढ़े वेतन और पद का लाभ नवम्बर 2008 से मिलेगा। राज्य सरकार ने डायेनेमिक एसीपी के अन्तर्गत हर छह साल पर तीन बार यानि नौकरी के18 वर्षो में तीन प्रोमोशन देने का निर्णय किया है। इस व्यवस्था के तहत धारित पद के ही उत्क्रमण के साथ प्रोन्नति देने का प्रावधान है। मेडिकल ऑफिसर के पद पर बहाल होने वाले पहले छठे साल पर सीनियर मेडिकल ऑफिसर, बारहवें साल पर डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर और आठरहवें साल पर चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद का लाभ और वेतनमान प्राप्त करेंगे। चूंकि पिछले 38 साल से प्रदेश के 95 फीसदी डाक्टरों को एक भी पद का प्रोमोशन नहीं मिला है इसलिए सरकार ने 18 वर्षो का लाभ यानि तीनों प्रोमोशन एक साथ देने का निर्णय किया है। इस व्यवस्था के पहले डाक्टरों को 12 वे वर्ष में पहला वित्तीय और 24 वे साल में दूसरा वित्तीय लाभ मिलता था। उन्हें पद के प्रोमोशन का लाभ नहीं मिलता था।  

राज्य सरकार ने अपना कमिटमेन्ट पूरा किया किया है। 24 घंटे मरीजों की सेवा करने वाले डाक्टरों का प्रोमोशन दशकों से बाधित था। सरकार ने फरवरी 2008 में बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के साथ समझौता किया था और अब वास्तविक लाभ दी जा रही है।’
         स्वास्थ्य मंत्री: नन्दकिशोर यादव

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