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ऑस्कर के बिना भी हिंदी फिल्मों पर फर्क नहीं

अमिताभ बच्चन लंदन में एक प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। एक पत्रकार ने पूछा, भारतीय फिल्म इंडस्ट्री हर साल करीब 1000 फिल्में बनाती है, लेकिन क्या वजह है कि इसकी किसी फिल्म को आज तक एक भी ऑस्कर अवार्ड नहीं मिला? उन्होंने जवाब दिया : ‘मुझे नहीं लगता कि भारतीय सिनेमा को ऑस्कर अवार्ड की जरूरत है। यह गलत सोच है कि किसी फिल्म को ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित किया जाना उस फिल्म की महानता की पुष्टि करता है। हमारी क्रियेटिविटी सर्वश्रेष्ठ है।’ इस सच्चाई की पृष्ठभूमि में कि स्लमडॉग मिलिनेयर भारतीय फिल्म नहीं है, हम कह सकते हैं कि ऑस्कर अवार्ड बिना जीते भी बॉलीवुड का लोकप्रिय सिनेमा और इसे संरक्षण देने वाली जनता के बीच के संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन ऑस्कर जीतने से क्या फर्क पड़ेगा? ऑस्कर जीतने से विश्व के उस नजरिए में भारी फर्क आएगा जिससे भारतीय सिनेमा को देखा जाता रहा है! ऑस्कर हमारी फिल्मों की छवि को बदल देगा और हमारी फिल्म इंडस्ट्री विश्व मनोरंजन बाजार में अपनी केवल 1 प्रतिशत की हिस्सेदारी को बढ़ा सकेगी। विश्व का मनोरंजन बाजार 87 अरब डॉलर का है। इसमें से भारतीय हिस्सेदारी है बस 1 अरब डॉलर की है। बॉलीवुड की केवल 15-20 प्रतिशत फिल्में ही अपनी लागत वसूल कर पाती हैं। ऑस्कर पाने के लिए असली चुनौती उन 5000 लोगों को प्रभावित करना होता है जो ऑस्कर अवार्ड चयन समिति के सदस्य होते हैं।

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