कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट नहीं होगा लश्कर: विशेषज्ञ - कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट नहीं होगा लश्कर: विशेषज्ञ DA Image
15 नबम्बर, 2019|12:08|IST

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कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट नहीं होगा लश्कर: विशेषज्ञ

कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट नहीं होगा लश्कर: विशेषज्ञ

अमेरिका के शीर्ष विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद का समाधान हो जाने पर भी भारतीय संसद और मुम्बई हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा संतुष्ट नहीं होगा और वह भारत तथा पश्चिमी जगत, खासकर अमेरिका के लिए गंभीर खतरा बना रहेगा।

प्रतिष्ठित संगठन कार्नेजी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में सीनियर एसोसिएट एशले जे टेलिस ने गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस के सामने सांसदों से कहा कि मेरे मन में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि हमें कश्मीर से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए रास्ते तलाशने चाहिए, लेकिन मेरा मानना है कि कश्मीर विवाद के समाधान से लश्कर ए तैयबा से संबंधित समस्याओं का समाधान नहीं होने जा रहा।

साउथ एशिया सेंटर, द अटलांटिक काउंसिल ऑफ यूनाइटेड स्टेटस के निदेशक और पाकिस्तानी विद्वान शुजा नवाज ने कहा कि कश्मीर समस्या के समाधान से खतरा नहीं मिटने जा रहा, क्योंकि इन समूहों का उद्देश्य पाकिस्तान के भीतर सत्ता हथियाना तथा उसका नियंत्रण हासिल करना है।

नवाज और टेलिस सुनवाई में अमेरिकी सांसदों की इस चिंता का जवाब दे रहे थे कि यदि कश्मीर समस्या का समाधान हो जाता है तो क्या लश्कर ए तैयबा आतंकवाद छोड़ देगा।

टेलिस ने कहा कि मुझे यह बात हमेशा सालती है कि कश्मीर घाटी में हत्याएं करने वाले और उत्पात मचाने वाले आज कश्मीरी नहीं हैं। जो लोग वास्तव में राजनीतिक अधिकारों से वंचित किए गए, वे हत्याओं और उत्पात में शामिल नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि घाटी में कत्लेआम और उत्पात ऐसे लोगों द्वारा मचाया जा रहा है जिनका कश्मीर से कोई संबंध नहीं है। मेरे दिमाग में यह बात है कि यह एक ऐसा समूह है जिसका 21 देशों में संचालन हो रहा है, उसकी विचारधारा पूरी तरह पश्चिम विरोधी है, वह उदारता और धर्मनिरपेक्षता तथा हमारे द्वारा अपनाए गए मूल्यों के खिलाफ है। यह समूह (लश्कर) कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट नहीं होने जा रहा।

हेरीटेज फाउंडेशन की लीसा कर्टिस ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा कश्मीर विवाद के समाधान के लिए सुझाए गए फॉर्मूले का जिक्र किया जिसके बारे में उन्होंने 2006 में बयान दिया था। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ ने दिसंबर 2006 में बहुत महत्वपूर्ण बयान दिया था कि यदि चार चीजें हो जाती हैं तो पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा छोड़ना चाहेगा।

कर्टिस ने कहा कि मुशर्रफ ने अपने फॉर्मूले में कहा था कि यदि कश्मीर को बांटने वाली नियंत्रण रेखा को अप्रासंगिक बना दिया जाए यानी कि दोनों ओर के लोग एक-दूसरी तरफ बिना रोक-टोक के आ-जा सकें तथा दूसरा यदि कश्मीर को और अधिक स्वायत्तता दे दी जाए और तीसरा यदि दोनों देश एक ऐसा संयुक्त तंत्र बनाएं जिससे दोनों ओर (पाकिस्तानी कश्मीर और भारतीय कश्मीर) के लोग आपस में संपर्क कर सकें तो समस्या का समाधान हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इसलिए मुशर्रफ का प्रस्ताव काफी उम्मीद भरा था। कर्टिस ने कहा कि यदि हम स्टीव कोल के बारे में बात करें जिन्होंने इस बारे में न्यूयॉर्कर मैगजीन में लिखा था तो वे (भारत-पाकिस्तान) कश्मीर को लेकर किसी तरह के समझौते के काफी करीब थे।

दूसरी ओर, भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाने वाले सांसद डैन बर्टन ने कहा कि लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान अमेरिका का शीर्ष उद्देश्य होना चाहिए और कश्मीर समस्या का समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि इस समस्या का समाधान करने का तरीका यही है कि इसमें भारत और पाकिस्तान सरकार तथा कश्मीर के लोगों को शामिल किया जाए और समस्या के समाधान के लिए कोई रास्ता निकाला जाए जो 1948 से ही बनी हुई है। जब तक आप यह नहीं करते तब तक इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला।

सांसद गैरी एकरमैन ने कहा कि यह सोचना एक गलती है कि लश्कर ए तैयबा वास्तव में भारत की समस्या है और सिर्फ जम्मू कश्मीर की तथाकथित स्वतंत्रता में उसकी रुचि है।

उन्होंने कहा कि यह बेशक सच है कि लश्कर के अभियानों का प्राथमिक क्षेत्र कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र रहा है कि लेकिन वह बार बार समूचे भारत में कत्लेआम की घटनाओं को अंजाम देता रहा है, उसके अभियान खासकर भारत सरकार के खिलाफ केंद्रित रहे हैं। लेकिन यह विचार बिल्कुल बेतुका है कि इस समूह को कश्मीर मुद्दे के समाधान से संतुष्ट किया जा सकता है ।

एकरमैन ने कहा कि लश्कर का एकमात्र उद्देश्य कश्मीर नहीं है कि यह भारत है। और लश्कर समूचे दक्षिण एशिया में इस्लामी शासन की स्थापना करने के अपने इरादे की घोषणा करने में झिझक महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा कि न तो यह संगठन सभी हिन्दुओं और यहूदियों के खिलाफ युद्ध की अपनी घोषणा को छिपाने की कोशिश करता है और न ही इसे कम करके बोलता है जिन्हें यह इस्लाम का दुश्मन मानता है।

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