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16 दिसंबर, 2019|4:33|IST

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मुद्दे तो हैं, लेकिन उठाए कौन

गॉर्डन ब्राउन एक करिश्मा हैं। वह करिश्माई बात करते हैं। हालांकि ब्रिटेन के लोग उनके कामकाज से बहुत खुश नहीं हैं। लेकिन वोटर को लुभाना वह जानते हैं। ब्राउन की वजह से उनकी लेबर पार्टी खासा आक्रामक नजर आती है। चुनावी साल में भी कंजरवेटिव पार्टी कुछ कर नहीं पा रही है। वह पार्टी लोगों तक पहुंच नहीं रही है। अपना चुनावी अभियान कायदे से नहीं चला रही है। इतने मुद्दे हैं जिन्हें लेकर ब्रिटेन परेशान है। लेकिन उन्हें उठाने की हिम्मत भी कंजरवेटिव नहीं जुटा पा रहे हैं। ब्राउन के पास तो मुद्दे ही नहीं हैं, फिर भी वह हावी नजर आ रहे हैं। यह गजब विरोधाभास है। दरअसल, टोरी लीडर कैमरोन अपने लोगों को जुट कर काम नहीं करा पा रहे हैं। वह ब्राउन की तरह तेजतर्रार नहीं हैं। ब्राउन तो जीत के लिए कोई भी खेल कर सकते हैं। उनके पास किसी भी तरह काम कराने वालों की टीम है। कैमरोन की पार्टी को यह चुनाव जीतना चाहिए। लेकिन उनकी पार्टी में वह दमखम नहीं दिखता, जो विजेता में होना चाहिए। 
टेलीग्राफ लंदन

औरतों की हिफाजत
काम करने की जगहों पर औरतों का उत्पीड़न न हो उसके लिए पाकिस्तान में एक कानून पास हो गया है। इस मसले से जुड़े बिल पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दस्तखत कर दिए हैं। पूरे दक्षिण एशिया में ऐसा कानून नहीं है। इसे पास कर पाकिस्तानी सरकार ने औरतों के लिए बेहतरीन काम किया है। अब औरतें अपने काम की जगहों पर ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी। अपने देश के लिए वह बेहतर काम कर पाएंगी। अपने समाज को आगे ले जाएंगी। लेकिन पाकिस्तान में एक दिक्कत है। वहां कई बेहतरीन कानून हैं। असल दिक्कत उन्हें लागू करने की है। काश! इस कानून को कायदे से लागू किया जाए। 
डॉन पाकिस्तान

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