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13 नबम्बर, 2019|10:31|IST

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अर्थव्यवस्था फिर तीव्र वृद्धि की राह पर लौटीः प्रणव

अर्थव्यवस्था फिर तीव्र वृद्धि की राह पर लौटीः प्रणव

सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था पर अब अनिश्चतता के बादल छंट चुके हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था फिर तीव्र वृद्धि की राह पर लौट चुकी है। वित्त मंत्री ने देश के अधिकतर भागों में कम बारिश तथा सूखे जैसी स्थिति के बावजूद अब अनिश्चितता जैसी कोई बात नहीं रह गयी है।

वित्त वर्ष 2010-11 के बजट पर लोक सभा में चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि हम विनम्रता पूर्वक दावा कर सकते हैं कि अर्थव्यवस्था अब करवट ले  चुकी है़ 7.2 फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर कोई मेरा कोई सपना नहीं है बल्कि यह हकीकत है, अनिश्चितता की स्थिति अब नहीं रह गयी है।
  
उन्होंने कहा कि खरीफ उत्पादन में 1.5 करोड़ टन से 1.8 करोड़ टन तक की गिरावट होने की आशंका है लेकिन औद्योगिक वृद्धि पिछले लगातार पांच महीने से दोहरे अंक में रही है और पिछले दो महीने में तो यह 15 फीसदी से भी अधिक रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट प्रस्ताव में उत्पाद शुल्क में दो फीसदी की बढ़ोतरी का मुद्रास्फीति पर कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा पर उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए प्रोत्साहन उपाय के तहत उत्पाद शुल्क को पिछले वर्ष 14 फीसदी से घटाकर विभिन्न चरणों में 8 फीसदी के स्तर पर लाया गया था।
  
प्रणव मुखर्जी ने पेट्रोलियम क्षेत्र पर शुल्कों में वृद्धि के बारे में कहा कि इसी प्रकार, जून 2008 में जब कच्चे तेल की कीमत 127 डालर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गयी थी, उद्योग को राहत देने के लिये इस पर लगने वाले 5 फीसदी के सीमा शुल्क को घटाकर शून्य के स्तर पर लाया गया।

वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ शुल्क में कटौती को वापस लिया गया है। बजट में आम आदमी की उपेक्षा के आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, उस समय, मैंने उद्योग को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में कटौती की थी।

उन्होंने कहा कि मैंने कोई अल्पकालिक नीति नहीं अपनायी। कर सुधार के बारे में उन्होंने विपक्ष से पूछा कि क्या उन्हें इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा, कर सुधारों की तत्काल जरूरत है। प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर के बारे में मुखर्जी ने कहा कि वह चाहते हैं कि दरों में कमी हो लेकिन सीमित छूट के साथ कर आधार बढ़े और वस्तुओं और सेवाओं पर कर समान स्तर पर रहे।

वस्तु और सेवा लागू कर अप्रत्यक्ष कर ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत पर बल देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्यों को (जीएसटी) के प्रस्ताव पर असहमति की खाई पाटने को कहा है ताकि 28 राज्य वस्तु और सेवा कर लागू करने के मामले में आम सहमति बन सके।

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