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12 नबम्बर, 2019|1:56|IST

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बंगला भाषा को लेकर सरकार पहल करे

झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष सीपी सिंह ने आज सदन में राज्य सरकार को बंगला भाषा समेत क्षेत्रिय भाषाओं के आधार पर विद्यालयों में पढाई और परीक्षा सुनिशचित करने का पहल करने का निर्देश दिया।

 सभाध्यक्ष ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक विद्युत वरण महतो के सवालों के प्रकरण में कहा कि सदन की भावना को समझते हुए सरकार को इस मुद्दों पर पहल करनी चाहिए। इससे पूर्व राज्य में मानव संसाधन मंत्री हेमलाल मुर्मू ने महतों के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि परीक्षा अधिनियम 2005 के आधार पर मैट्रिक परीक्षा का माध्यम हिन्दी या अंग्रेजी रखा गया है इसलिए बंगला भाषा में मैट्रिक की परीक्षा नहीं ली जा सकती है।
 मुर्मू ने कहा कि छात्रों को बंगला भाषा को ऐच्छिक विषय के रूप में चयन करना होगा और यह विषाय मात्र 50 अंक का हेगा।

मुर्मू के जवाब से विपक्षी सदस्यों में से राष्ट्रीय जनता दल के विधायक दल के नेत अन्नपूर्णा देवी झामुमो प्रजातांत्रिक के प्रदीप यादव फुलचंद मंडल और समरेश सिंह कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह एंव के.एन.त्रिपाठी ने सदन में हंगामा किया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार उर्दू को द्वितीय राज्य भाषा का दर्जा दी हुई है।राज्य में 32 प्रतिशत लोग बंगला भाषी है।

 विपक्षी सदस्ययों ने कहा कि पिछले वर्ष मैट्रिक की परीक्षा बंगला भाषा में ली गई थी लेकिन इस वर्ष अचानक फैसला बदल कर लाखों बंगला भाषी छात्रें के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

 राजद की अन्नपूर्णा देवी ने सरकार को सुझाव देती हुई कहा कि सरकार को बंगला भाषा में परीक्षा लेने के लिए यदि कोई नियम में संशोधन की जरूरत की आवश्यकता हो तो वह सदन में लाए। अरूप चर्टजी ने सदन को अवगत कराते हुए कहा कि बिहार में जब प्रत्एक विषय की परीक्षा बंगला भाषा में हो सकती है तो झारखंड में भी होनी चाहिए।

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