सरकार का पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटाने से इनकार - सरकार का पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटाने से इनकार DA Image
11 दिसंबर, 2019|8:54|IST

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सरकार का पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटाने से इनकार

सरकार का पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटाने से इनकार

सरकार ने पेट्रोल, डीजल के दाम में वृद्धि को वापस लेने की विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज करते हुये शुक्रवार को कहा कि उसकी वित्तीय स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती। सरकार के इस जबाव पर असंतोष व्यक्त करते हुए भाजपा और वाम सहित समूचे विपक्ष के अलावा सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे सपा, बसपा और राजद के सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया। 

विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा ने सरकार से पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य वृद्धि विशेष तौर पर डीजल की वृद्धि को वापस लेने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि इसका पहले से ही महंगाई के बोझ तले दबे आम आदमी पर और गहरा असर पडेगा।
   
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आम बजट पर दो दिन की चर्चा का जवाब देते हुए सिन्हा के अनुरोध को यह कहते हुये ठुकरा दिया कि मेरी वित्तीय स्थिति मुझे ऐसा करने की अनुमति नहीं देती, इसलिये कृपया मुझे क्षमा करें। उनका कहना था कि उन्होंने कोई कर वृद्धि नहीं की है बल्कि इन पर उत्पाद और सीमा शुल्क में पूर्व में की गयी कटौती को वापस लिया है।

वित्त मंत्री के उत्तर के बाद सदन ने वर्ष 2010-11 की लेखानुदान मांगों और वर्ष 2009-10 की अनुपूरक अनुदान मांगों तथा तत्संबंधी विनियोग विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही आम बजट को पारित करने का पहला चरण पूरा हो गया। मुखर्जी ने विपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि उनका बजट किसान, खेती और आम आदमी के खिलाफ है। उन्होंने अपने जबाव में ब्यौरेवार विपक्ष के हर सवाल का जबाव दिया।
   
पूरे जोश में दिख रहे मुखर्जी ने अपने भाषण में मुख्य विपक्षी दल भाजपा को निशाने पर रखा। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने आम आदमी की बेहतरी के लिये न केवल वादे किये बल्कि उन्हें कानूनी अधिकार देकर ठोस पहल की। सरकार ने आम आदमी को सूचना, रोजगार, शिक्षा के क्षेत्र में कानून बनाकर अधिकार दिये और जल्द ही खाद्य सुरक्षा का अधिकार भी दिया जायेगा।
   
मुखर्जी ने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिये उन्होंने कोष बनाने की घोषणा की है। इसका लाभ भी विभिन्न क्षेत्रों में काम में लगे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकारों से इसमें योगदान के लिये आगे आने का आह्वान किया। नई पेंशन योजना में उनकी भागीदारी से असंगठित क्षेत्र के 10 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
 
कृषि क्षेत्र में कम आवंटन को लेकर विपक्ष की आलोचना झेल रहे मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिये व्यापक कार्यक्रम की घोषणा की है। जैसे-जैसे इसमें काम आगे बढेगा आवंटन भी बढाया जायेगा। उन्होंने कहा कि छह साल के वाजपेयी शासन में कृषि क्षेत्र का योजना आवंटन मात्र छह प्रतिशत बढा जबकि मनमोहन सरकार के छह वषों में इसमें 26 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।

पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई वृद्धि के संदर्भ में अपनी स्थिति साफ करते हुए मुखर्जी ने कहा कि वास्तव में उन्होंने इन पर कोई नया कर नहीं लगाया है बल्कि जो शुल्क पहले वापस ले लिये गये थे उनके कुछ हिस्से को फिर से बहाल किया गया है।

बजट में कच्चे तेल पर पांच प्रतिशत सीमा शुल्क फिर से बहाल करने के साथ पेट्रोल तथा डीजल पर एक रूपये प्रति लीटर के हिसाब से उत्पाद शुल्क लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2008 में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे जब घरेलू बाजार में आम आदमी को इस बोझ से बचाने के लिए सीमा शुल्क को समाप्त कर दिया गया था।

विपक्षी भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि मार्च 1998 से लेकर मई 2004 की अवधि में कच्चे तेल के दाम 12 से 36 डालर प्रति बैरल के बीच थे लेकिन तब पेट्रोल के दाम में 48 प्रतिशत, डीजल में 112 प्रतिशत और केरोसिन तेल में 258 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई।

लेकिन संप्रग सरकार के छह साल के कार्यकाल में कच्चे तेल के दाम में काफी उतार चढ़ाव रहा। कच्चे तेल की भारतीय खरीद का औसत मूल्य इस दौरान 36 डालर से बढ़कर 118 डालर हो गया और फिलहाल यह 84 डालर प्रति बैरल के दायरे में चल रहा है। इसके बावजूद पेट्रोल के दाम में 41 प्रतिशत, डीजल में 63 प्रतिशत और कैरोसिन के दाम मात्र दो प्रतिशत ही बढ़ाये गये।

रसोई गैस के दाम राजग शासन में जहां 78 प्रतिशत बढ़ाये गये वहीं संप्रग सरकार में इसमें लगभग 16 प्रतिशत की ही वृद्धि की गई। मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने इस मामले में तात्कालिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया।

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