मशहूर भारतीय अर्थशास्त्री राकेश मोहन बने येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर - मशहूर भारतीय अर्थशास्त्री राकेश मोहन बने येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर DA Image
20 नबम्बर, 2019|12:44|IST

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मशहूर भारतीय अर्थशास्त्री राकेश मोहन बने येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर

मशहूर भारतीय अर्थशास्त्री राकेश मोहन को प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी के संकाय सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे वह पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, मेक्सिको के पूर्व राष्ट्रपति एर्नेस्टो जेडिलो और राजेंद्र पचौरी की श्रेणी में शामिल हो गए हैं।

येल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष रिचर्ड सी लेविन ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि मोहन को येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में प्रैक्टिस ऑफ इंटरनेशनल इकोनोमिक्स एंड फाइनेंस के प्रोफेसर और येल यूनिवर्सिटी के जैक्सन इंस्टिट्यूट में बतौर वरिष्ठ फेलो नियुक्त किया गया है। हाल तक भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रहे मोहन की नियुक्ति एक जुलाई 2010 से शुरू होगी।

लेविन ने कहा कि राकेश मोहन भारत के अत्यधिक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों में से एक रहे हैं और उन्होंने अभूतपूर्व वृद्धि तथा चुनौतियों के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्रीय बैंकिंग समुदाय के लिए सराहनीय सेवा दी। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि प्रोफेसर मोहन येल में अगली पीढ़ी के अर्थशास्त्रियों तथा अंतरराष्ट्रीय नेताओं के प्रशिक्षण में अपने अनुभव और ज्ञान की शिक्षा उपलब्ध कराएंगे।

इस बारे में मोहन ने कहा कि मैं येल में लौटकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि 40 साल पहले मैंने यहीं से स्नातक स्तर में अर्थशास्त्र में अपना अध्ययन शुरू किया।

मोहन ने अर्थशास्त्र में बीए की उपाधि येल यूनिवर्सिटी से, जबकि अर्थशास्त्र में एमए और पीएचडी की उपाधि प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से हासिल की। वह इंपीरियल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीएस भी हैं। वह 2005 से येल प्रेजीडेंटस काउंसिल ऑन इंटरनेशनल एक्टिविटीज (पीसीआईए) के सदस्य भी रहे हैं।

मोहन वर्तमान में इंडियन इंस्टि्यूट ऑफ हयूमैन सेटलमेंटस के गैर कार्यकारी उपाध्यक्ष तथा मैक्किनसे ग्लोबल इंस्टिटयूट, मैक्किन्से एंड कंपनी के वैश्विक सलाहकार हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फरवरी 2010 में मोहन को भारत के लिए परिवहन नीति की सिफारिश के लिए बहु मंत्रालयी राष्ट्रीय परिवहन विकास नीति समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

मोहन आर्थिक सुधारों और उदारीकरण, औद्योगिक अर्थशास्त्र, शहरी अर्थशास्त्र, बुनियादी संरचना संबंधी अध्ययन, अर्थिक नियमन, मौद्रिक नीति और वित्तीय क्षेत्र में गहन अध्ययन और अनुसंधान कर चुके हैं। वह नगरीय अर्थशास्त्र तथा नगरीय विकास पर तीन पुस्तकें लिख चुके हैं तथा भारतीय आर्थिक नीति सुधारों पर एक पुस्तक के सह लेखक और संपादक हैं।

वह सितंबर 2002 से अक्टूबर 2004 और फिर जून 2005 से जुलाई 2009 तक भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर रहे। वह वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामला विभाग के सचिव भी रहे।

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